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Atal Bihari Vajpayee Poems In Hindi: अटल बिहारी वाजपेयी की प्रसिद्ध व सर्वश्रेष्ठ कविताएं, पत्थर में भी फूंक सकती हैं जान

Atal Bihari Vajpayee Poems In Hindi: कल यानी 25 दिसंबर को पूरे भारतवर्ष में अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती को सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस खास मौके पर हम आपके लिए अटल बिहारी वाजपेयी की कविताएं लेकर आए हैं।

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Atal Bihari Vajpayee Poems In Hindi: अटल बिहारी वाजपेयी की प्रसिद्ध कविताएं

Atal Bihari Vajpayee Poems In Hindi: अटल बिहारी वाजपेयी महान राष्ट्रवादी, ओजस्वी वक्ता और महान (Atal Bihari Vajpayee Poems) कवि थे। उनका जन्म जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर (Atal Bihari Vajpayee Kavita) में हुआ। अटल जी के पिता श्रीकृष्ण वाजपेयी ग्वालियर रियासत के शिक्षक थे, वह मूलरूप से आगरा के रहने वाले थे। अटल जी की प्रारंभिक शिक्षा ग्वालियर के गोरखी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर से हुई। कल यानी 25 दिसंबर को पूरे देश में अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म जयंती को सुशासन दिस के रूप में मनाया जाएगा। इस खास मौके पर हम आपके लिए अटल बिहारी वाजपेयी की कविताएं लेकर आए हैं।

Atal Bihari Vajpayee Poems In Hindi: मौत से ठन गई

जूझने का मेरा इरादा न था,

मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,

रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,

यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई।

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,

ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं।

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ,

लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ?

तू दबे पाँव, चोरी-छिपे से न आ,

सामने वार कर फिर मुझे आज़मा।

मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र,

शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर।

बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं,

दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं।

प्यार इतना परायों से मुझको मिला,

न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला।

हर चुनौती से दो हाथ मैंने किये,

आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए।

आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है,

नाव भँवरों की बाँहों में मेहमान है।

पार पाने का क़ायम मगर हौसला,

देख तेवर तूफ़ाँ का, तेवरी तन गई।

Atal Bihari Kavita Aao Phir Se Diya Jalaye: आओ फिर से दिया जलाएँ

आओ फिर से दिया जलाएँ

भरी दुपहरी में अँधियारा

सूरज परछाई से हारा

अंतरतम का नेह निचोड़ें-

बुझी हुई बाती सुलगाएँ।

आओ फिर से दिया जलाएँ

हम पड़ाव को समझे मंज़िल

लक्ष्य हुआ आँखों से ओझल

वर्त्तमान के मोहजाल में-

आने वाला कल न भुलाएँ।

आओ फिर से दिया जलाएँ।

आहुति बाकी यज्ञ अधूरा

अपनों के विघ्नों ने घेरा

अंतिम जय का वज़्र बनाने-

नव दधीचि हड्डियाँ गलाएँ।

आओ फिर से दिया जलाएँ

Atal Bihari Kavita Badhaein Aati hain: बाधाएँ आती हैं आएँ

बाधाएँ आती हैं आएँ

घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,

पावों के नीचे अंगारे,

सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,

निज हाथों में हँसते-हँसते,

आग लगाकर जलना होगा।

क़दम मिलाकर चलना होगा।

हास्य-रूदन में, तूफ़ानों में,

अगर असंख्यक बलिदानों में,

उद्यानों में, वीरानों में,

अपमानों में, सम्मानों में,

उन्नत मस्तक, उभरा सीना,

पीड़ाओं में पलना होगा।

क़दम मिलाकर चलना होगा।

उजियारे में, अंधकार में,

कल कहार में, बीच धार में,

घोर घृणा में, पूत प्यार में,

क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,

जीवन के शत-शत आकर्षक,

अरमानों को ढलना होगा।

क़दम मिलाकर चलना होगा।

सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,

प्रगति चिरंतन कैसा इति अब,

सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,

असफल, सफल समान मनोरथ,

सब कुछ देकर कुछ न मांगते,

पावस बनकर ढलना होगा।

क़दम मिलाकर चलना होगा।

कुछ काँटों से सज्जित जीवन,

प्रखर प्यार से वंचित यौवन,

नीरवता से मुखरित मधुबन,

परहित अर्पित अपना तन-मन,

जीवन को शत-शत आहुति में,

जलना होगा, गलना होगा।

क़दम मिलाकर चलना होगा।

Atal Bihari Kavita Geet Naya Gata Hun: गीत नया गाता हूं

टूटे हुए तारों से फूटे वासंती स्वर

पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर

झरे सब पीले पात, कोयल की कुहुक रात

प्राची में अरुणिमा की रेख देख पाता हूँ

गीत नया गाता हूँ

टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी

अंतर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी

हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा

काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूँ

गीत नया गाता हूँ

यहां आप अटल बिहारी वाजपेयी की प्रसिद्ध व सर्वश्रेष्ठ कविताएं पढ़ सकते हैं।

TNN Education Desk
TNN एजुकेशन डेस्क author

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