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राजा रघुवंशी हत्याकांड में इस्तेमाल हथियार बरामद, किसने किया था पहला वार?

मेघालय पुलिस ने राजा रघुवंशी हत्याकांड में इस्तेमाल हुए हथियार को बरामद कर लिया है। गौर हो कि राजा रघुवंशी पर पहले आरोपी विशाल ने हमला किया था और इस दौरान राजा ने खुद को बचाने की कोशिश की थी। इस हथियार को फॉरेसिंक जांच के लिए भेजा गया है।

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राजा रघुवंशी के कत्ल के लिए इस्तमाल हथियार बरामद

नई दिल्ली: राजा रघुवंशी हत्याकांड मामले में पुलिस को धारदार हथियार बरामद हुआ है। पुलिस ने फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है। सूत्रों के मुताबिक राजा रघुवंशी की हत्या को अंजाम देने के लिए पूर्वोत्तर के खास हथियार डाव से कई हमले किए गए थे। इस डाव को गुवाहाटी रेलवे स्टेशन के पास से खरीदा था। इस हथियार को यहां के स्थानीय भाषा में डाव कहते हैं।

आकाश के कपड़े पर राजा की हत्या के दौरान राजा के शरीर के खून के निशान आकाश के कपड़े में लगे थे। पुलिस लंबे समय से उस हथियार की तलाश कर रही थी जिससे राजा रघुवंशी की हत्या की गई थी। यह हथियार यकीनन पुलिस के लिए हत्या की कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित होगा। सूत्रों के मुताबिक इसी हथियार से राजा पर कई वार किए गए थे और पहला वार आरोपी विशाल ने किया था।

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राजा रघुवंशी हत्याकांड में इसी हथियार का इस्तेमाल किया गया था

राजा हत्याकांड में सोनम समेत पांच गिरफ्तार

राजा रघुवंशी हत्याकांड के पांचों आरोपी फिलहाल मेघालय पुलिस की हिरासत में हैं, जिनसे पूछताछ के जरिये इस वारदात की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। मेघालय में हनीमून मनाने गए राजा रघुवंशी (29) की साजिशन हत्या में शामिल होने के आरोप में उनकी पत्नी सोनम (25) और उसके कथित प्रेमी राज कुशवाह (20) समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। रघुवंशी पूर्वोत्तर के इस सूबे में 23 मई को लापता हो गए थे और ऐसा माना जा रहा है कि इसी तारीख को उनकी हत्या कर दी गई थी।

नाकाम हो गई नापाक साजिश

राजा रघुवंशी के हत्यारों की योजना किसी महिला की हत्या कर उसके शव को जलाने की थी, ताकि उसे राजा की पत्नी सोनम का शव बताया जा सके और सोनम सच्चाई सामने आने तक कुछ और दिनों तक छिपी रहे। मेघालय पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

मेघालय पुलिस को यह भी पता चला कि सोनम का कथित प्रेमी राज कुशवाह हत्या की साजिश का मास्टरमाइंड था और वह सह-साजिशकर्ता थी।

20 मई को हुए थे हनीमून के लिए रवाना

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राजा हत्याकांड में इस्तेमाल हथियार बरामद

सोनम ने उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में पुलिस के सामने आठ जून को देर रात आत्मसमर्पण कर दिया, जबकि कुशवाहा समेत चार आरोपियों को मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार किया गया था। राजा का परिवार ट्रांसपोर्ट के कारोबार से जुड़ा है। सोनम और राजा की शादी 11 मई को इंदौर में हुई थी और वे 20 मई को हनीमून के लिए गुवाहाटी रवाना हुए थे। मेघालय पुलिस का विशेष जांच दल (एसआईटी) राजा रघुवंशी की हत्या के मामले की तहकीकात कर रहा है।

2 जून को मिला था राजा का शव

राजा और सोनम 23 मई को मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा इलाके में छुट्टियां मनाते समय लापता हो गए थे। राजा का शव दो जून को एक खड्ड में मिला था, जबकि सोनम घटना के बाद से लापता थी। राजा रघुवंशी का शव दो जून को पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा क्षेत्र (जिसे चेरापूंजी भी कहा जाता है) में एक झरने के पास गहरी खाई में मिला था जिसके सिर पर घातक चोटें थीं। इसके बाद खून से सना धारदार हथियार और अन्य सामान भी बरामद किया गया था। (एजेंसी इनपुट के साथ)
Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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