जनता दल (सेक्युलर) के पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना, जो कभी कर्नाटक के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एक के उभरते चेहरे माने जाते थे, आज राजनीतिक पतन और कानूनी शिकंजे की एक चौंकाने वाली मिसाल बन चुके हैं। 1 अगस्त 2025 को बेंगलुरु स्थित सांसदों-विधायकों की विशेष अदालत ने उन्हें बलात्कार का दोषी ठहराया, और 2 अगस्त को उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई। यह फैसला एक ऐसे मुकदमे की परिणति है जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
कौन हैं प्रज्वल रेवन्ना
प्रज्वल रेवन्ना, जनता दल (सेक्युलर) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवगौड़ा के पोते हैं। वह कर्नाटक के हासन लोकसभा क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं और पूर्व मंत्री एच. डी. रेवन्ना के बेटे हैं। एक समय उन्हें पार्टी का अगला चेहरा और युवा नेतृत्व माना जाता था, लेकिन आज उनका नाम यौन शोषण, बलात्कार, और फर्जीवाड़े जैसे गंभीर आरोपों में दर्ज है।
कहां से शुरू हुआ विवाद?
प्रज्वल रेवन्ना के राजनीतिक भविष्य पर पहला बड़ा सवाल अप्रैल 2024 में खड़ा हुआ, जब हासन लोकसभा सीट के लिए चुनाव प्रचार के दौरान उनके कथित सेक्स वीडियो पेन ड्राइव में लीक हुए। इन वीडियो के सामने आने के बाद रेवन्ना ने इसे राजनीतिक साजिश बताया और दावा किया कि उनकी छवि को चुनाव से पहले धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। इसके बावजूद, उन्होंने 26 अप्रैल को मतदान के बाद राजनयिक पासपोर्ट पर देश छोड़ दिया, जो बाद में उनके खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच को और जटिल बना गया।
यौन उत्पीड़न और बलात्कार के आरोप
28 अप्रैल को एक पूर्व घरेलू सहायिका ने आरोप लगाया कि रेवन्ना ने उसके साथ दो बार बलात्कार किया—पहली बार हासन स्थित गन्निकाडा फार्महाउस में और दूसरी बार बेंगलुरु के बसवनगुडी स्थित आवास पर, जब देश कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान बंद था। 29 अप्रैल को पीड़िता अचानक लापता हो गई और आरोप लगा कि रेवन्ना के माता-पिता ने उसका अपहरण किया ताकि वह गवाही न दे सके। हालांकि, 4 मई को विशेष जांच दल (SIT) ने पीड़िता को छुड़ा लिया।
जांच, गिरफ्तारी और डीएनए सबूत
कर्नाटक सरकार ने मामले की जांच के लिए महिला अधिकारियों वाली एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया। SIT ने रेवन्ना के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया और लुकआउट नोटिस जारी किया। 31 मई को, जैसे ही रेवन्ना जर्मनी से भारत लौटे, उन्हें हवाई अड्डे पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। मामले की जांच तेज़ी से आगे बढ़ी, और 2 नवंबर 2024 को एक बड़ा सबूत सामने आया—पीड़िता के कपड़ों पर रेवन्ना का डीएनए मिला, जिससे बलात्कार के आरोपों को और बल मिला।
अदालत में लंबी लड़ाई
रेवन्ना ने कई बार जमानत की कोशिश की, लेकिन कर्नाटक हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने उसे खारिज कर दिया। SIT ने दो चरणों में कुल 1,632 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया। अदालत ने 1 अगस्त 2025 को रेवन्ना को दोषी ठहराया और 2 अगस्त को उन्हें उम्रकैद की सजा सुना दी।
राजनीतिक और सामाजिक असर
प्रज्वल रेवन्ना का यह पतन सिर्फ एक व्यक्ति की कानूनी सज़ा नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक वंशवाद, सत्ता के दुरुपयोग और जवाबदेही की पूरी बहस को फिर से केंद्र में ले आया है। जद (एस) ने रेवन्ना को पहले ही पार्टी से निलंबित कर दिया था, लेकिन यह मामला पार्टी और राज्य की राजनीति में गहरी दरार छोड़ गया है।
