क्राइम

इंसानियत तार-तार: गर्भवती महिला के शव के साथ दो बच्चों को जिंदा नदी में फेंका, दो गिरफ्तार

Crime News in Hindi: पुणे में 25 वर्षीय गर्भवती महिला की उस समय मौत हो गई थी जब उसके प्रेमी और मुख्य आरोपी गजेंद्र दगड़खैरे ने उसे गर्भपात के लिए मुंबई के निकट ठाणे भेजा था। मौत के बाद गजेंद्र ने उसके शव को इंद्रायणी नदी में फेंक दिया। इसके बाद उसके दो और पांच साल के बच्चे को भी फेंक दिया।

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Pune Crime News

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Crime News: महाराष्ट्र के पुणे से ऐसा मामला सामने आया है, जो इंसानियत को तार-तार करने वाला है। यहां एक व्यक्ति ने गर्भवती महिला की मौत के बाद उसके शव और उसके दो अन्य बच्चों को जिंदा नदी में फेंक दिया। पुलिस ने इस मामले में आरोपी समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बताया कि मामला पिंपरी चिंचवाड़ थाने कहा है, यहां 25 वर्षीय गर्भवती महिला की मौत हो गई थी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, 25 वर्षीय गर्भवती महिला की उस समय मौत हो गई थी जब उसके प्रेमी और मुख्य आरोपी गजेंद्र दगड़खैरे ने उसे गर्भपात के लिए मुंबई के निकट ठाणे भेजा था। नौ जुलाई को वापस आते समय दगड़खैरे और उसके साथी रविकांत गायकवाड़ ने महिला के शव को तालेगांव के पास इंद्रायणी नदी में फेंक दिया। जब उसके दो और पांच साल के बच्चे रोने लगे तो दोनों ने उन्हें भी नदी में फेंक दिया।

पति से अलग रह रही थी महिला

पुलिस ने बताया कि महिला अपने पति से अलग हो गई थी और दगड़खैरे से उसके शारीरिक संबंध थे, जिसके कारण वह गर्भवती हो गई थी। उन्होंने बताया कि महिला की मां द्वारा पुलिस से गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने के बाद जांच शुरू हुई और तकनीकी साक्ष्य के आधार पर दगड़खैरे और गायकवाड़ को गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारी ने बताया, महिला और दोनों बच्चों के शव अब तक नहीं मिले हैं। दगड़खैरे और गायकवाड़ को 30 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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