Prayagraj Family Murder Case: प्रयागराज में एक ही परिवार के चार सदस्यों की हत्या के सनसनीखेज मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया कि कारोबारी वीरेंद्र कुमार वैश्य, उनकी पत्नी अनीता वैश्य और बेटी मीनाक्षी वैश्य की हत्या उनके बड़े बेटे अभिषेक ने की थी। इसके बाद अभिषेक की हत्या उसके दोस्त सनी गुप्ता ने कर दी। पुलिस ने आरोपी सनी को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के साउथ मलाका इलाके का है, जहां पुलिस को एक घर के अंदर तीन शव मिले थे।
मृतकों की पहचान 70 वर्षीय वीरेंद्र कुमार वैश्य, उनकी 65 वर्षीय पत्नी अनीता वैश्य और 45 वर्षीय बेटी मीनाक्षी वैश्य के रूप में हुई। शवों पर चोटों के निशान मिलने के बाद पुलिस को हत्या की आशंका हुई और जांच तेज कर दी गई। जांच के दौरान कुछ घंटों बाद पुलिस को घर के नीचे स्थित मार्केट की एक दुकान से चौथा शव बरामद हुआ। बाद में उसकी पहचान वीरेंद्र के बड़े बेटे अभिषेक के रूप में हुई। मामले ने उस समय और अधिक उलझन पैदा कर दी, जब जिस दुकान से अभिषेक का शव मिला, वहां बिजली के बोर्ड पर लिखा मिला कि “बंटी, बबली और बहू ने मारा है।”
12 घंटे के अंदर किया पुलिस ने खुलासा
वहीं पुलिस ने महज 12 घंटे के भीतर खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि यह वारदात संपत्ति विवाद से जुड़ी थी और इसकी साजिश परिवार के ही सदस्य ने रची थी। हालांकि घटनाक्रम ने ऐसा मोड़ लिया कि मुख्य साजिशकर्ता को भी अपनी जान गंवानी पड़ी। पुलिस के अनुसार, करोड़पति कारोबारी वीरेंद्र वैश्य, उनकी पत्नी और बेटी की हत्या उनके बड़े बेटे अभिषेक ने अपने पड़ोसी और मित्र सनी गुप्ता के साथ मिलकर की थी।
बड़े बेटे को संपत्ति से बेदखल करने की तैयारी
बताया गया कि वीरेंद्र वैश्य अपने बड़े बेटे को संपत्ति से बेदखल करने की तैयारी कर रहे थे। इसी बात से नाराज अभिषेक ने पूरे परिवार को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने घर से करीब डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य के आभूषण भी अपने कब्जे में ले लिए। लेकिन बाद में लूटे गए सामान के बंटवारे को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। पुलिस का कहना है कि इसी विवाद के चलते सनी गुप्ता ने अभिषेक की भी हत्या कर दी और मौके से फरार हो गया।
परिवार में तनाव और कहासुनी
पुलिस आयुक्त जोगिंदर कुमार के मुताबिक, वीरेंद्र वैश्य का 40 वर्षीय बेटा अभिषेक लंबे समय से आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा था और उस पर काफी कर्ज था। उसकी गतिविधियों और व्यवहार से नाराज होकर पिता ने उसे अपनी संपत्ति से अलग कर दिया था। इसी मुद्दे को लेकर परिवार में अक्सर तनाव और कहासुनी होती रहती थी। जांच में सामने आया कि अभिषेक ने अपने पड़ोसी और मित्र सनी गुप्ता के साथ मिलकर परिवार के सदस्यों की हत्या और घर में रखे कीमती गहनों को हड़पने की साजिश बनाई थी। पुलिस के अनुसार, 31 मई की शाम दोनों ने साथ समय बिताया और फिर अपने प्लान को अंजाम देने की तैयारी की।
दोनो आरोपियों के बीच विवाद
बताया जा रहा है कि शाम करीब पांच बजे अभिषेक की 45 वर्षीय बहन मीनाक्षी घर से नीचे स्थित दुकान की ओर जा रही थी। इसी दौरान सीढ़ियों पर उसकी हत्या कर दी गई और शव को ऊपर ले जाया गया। इसके बाद दोनों आरोपियों ने कमरे में मौजूद माता-पिता पर हमला कर उनकी भी जान ले ली। वारदात के बाद घर में रखे बड़ी मात्रा में आभूषण अपने कब्जे में ले लिए गए। हालांकि, अपराध को अंजाम देने के बाद जब दोनों लूटे गए गहनों के बंटवारे के लिए नीचे स्थित एक दुकान में बैठे, तो उनके बीच विवाद शुरू हो गया। पुलिस के अनुसार, इसी दौरान सनी गुप्ता के मन में आशंका और लालच दोनों पैदा हो गए। उसे यह डर सताने लगा कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता और बहन तक का नहीं हुआ, वह भविष्य में उसके लिए भी खतरा बन सकता है।
"बंटी, बबली और बहू ने मारा"
पुलिस जांच के अनुसार, लालच और पकड़े जाने के डर ने सनी गुप्ता ने लोहे के पाइप से हमला कर अभिषेक की हत्या कर दी। वारदात के बाद सबूत मिटाने की कोशिश में सनी ने शव पर टॉयलेट साफ करने वाला तेजाब डाल दिया और मौके पर फैले खून के निशानों को भी साफ करने का कोशिश की। इसके बाद वह वहां से फरार हो गया। जांच में यह भी सामने आया कि पुलिस को गुमराह करने के लक्ष्य से घटनास्थल पर एक संदेश छोड़ा गया था। एक कार्डबोर्ड पर लिखा गया था कि, "बंटी, बबली और बहू ने मारा"।सनी गुप्ता को किया गया गिरफ्तार
मामले का खुलासा तब हुआ जब मंगलवार शाम मकान से तेज बदबू आने लगी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और बंद घर का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया। तलाशी के दौरान चारों शव बरामद हुए। घटनास्थल पर मिले संदेश के बावजूद पुलिस ने तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त ने जांच के लिए पांच विशेष टीमें गठित कीं। लगातार कार्रवाई और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से पुलिस ने मुख्य आरोपी सनी गुप्ता को उसके मुट्ठीगंज स्थित घर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ और जांच के बाद पूरे हत्याकांड की परतें खुलती चली गईं।
क्या-क्या हुआ बरामद?
पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसके कब्जे से हत्या में इस्तेमाल हुआ लोहे का पाइप, 1002.12 ग्राम सोना, 360.26 ग्राम चांदी और नकदी बरामद की है। अधिकारियों के अनुसार, बरामद किए गए आभूषणों की अनुमानित बाजार कीमत करीब 1.5 करोड़ रुपये है। एडिशनल सीपी लॉ एंड ऑर्डर डॉ. अजय पाल शर्मा और डीसीपी सिटी मनीष कुमार शांडिल्य के नेतृत्व में पुलिस टीम ने लगातार जांच कर आरोपी तक पहुंचने में सफलता हासिल की। वहीं, मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में साउथ मलाका चौकी प्रभारी रोहित गौड़ और उपनिरीक्षक मुलायम सिंह यादव को निलंबित कर दिया गया है।
हाल ही में जेल से रिहा हुई है पत्नी
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि मृतक कारोबारी वीरेंद्र वैश्य का छोटा बेटा अश्वनी वैश्य वर्तमान में कौशांबी जेल में बंद है, जबकि उसकी पत्नी हाल ही में जेल से रिहा हुई है। दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित कई मामले दर्ज बताए जाते हैं। दूसरी ओर, बड़े बेटे अभिषेक के व्यवहार और गतिविधियों को लेकर भी परिवार में असंतोष था। पुलिस के मुताबिक, इसी वजह से वीरेंद्र वैश्य ने उसे अपनी संपत्ति से अलग करने का फैसला किया था। पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने बताया कि मामले का खुलासा महज 12 घंटे के अंदर करने वाली पूरी पुलिस टीम को 50 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। उधर, प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मीडिया से बातचीत में गिरफ्तार आरोपी सनी गुप्ता ने दावा किया कि अभिषेक ने ही उसे इस वारदात में शामिल होने के लिए प्रेरित किया था। उसका आरोप है कि बाद में अभिषेक लूटे गए माल में हिस्सा देने से पीछे हट रहा था, जिसके चलते दोनों के बीच विवाद पैदा हुआ और घटनाक्रम ने हिंसक रूप ले लिया।
