झारखंड के सबसे गैंगस्टर अमन साहू का पलामू में एनकाउंटर हो गया है। अमन साहू झारखंड का मोस्ट वांटेड क्रिमिनल में से एक था और उसके ऊपर हत्या और अपहरण समेत 100 से ज्यादा मामले दर्ज थे। अमन साहू का एनकाउंटर तब हुआ, जब उसे रायपुर से रांची लाया जा रहा था।
विकास दुबे की तरह पलटी अमन साहू की गाड़ी
अमन साहू को छ्त्तीसगढ़ में गिरफ्तार किया गया था। जहां से उसे पूछताछ के लिए रांची लाया जा रहा है। रांची लाने के क्रम में जब पुलिस की गाड़ी पलामू पहुंची तो एक्सीडेंट का शिकार हो गई। जिसके बाद अमन साहू को मौका मिला और पुलिस से हथियार छीन कर फरार होने की कोशिश करने लगे, जिसके बाद पुलिस ने उसका एनकाउंटर कर दिया। पुलिस के अनुसार, साहू ने पुलिस की जीप पलटने के बाद भागने की कोशिश की। भागने की कोशिश के दौरान उसने अधिकारियों पर गोली चलाई, जिससे झारखंड पुलिस का एक जवान घायल हो गया। जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिससे उसकी मौत हो गई।
विकास दुबे की तरह पलटी अमन साहू की गाड़ी
अमन साहू का एनकाउंटर यूपी के चर्चित गैंगस्टर विकास दुबे की याद दिलाता है, विकास दुबे का भी एनकाउंटर कुछ इसी तरह से मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश लाने के क्रम में किया गया था।
कौन था अमन साहू
अमन साहू पर कई आपराधिक आरोप हैं, जिसमें 7 मार्च को रांची में कोयला व्यापारी पर दिनदहाड़े गोली चलाने की साजिश भी शामिल है। हमले के बाद सभी आरोपी मौके से भाग गए और साहू की पहचान मुख्य साजिशकर्ता के रूप में हुई। इस और अन्य आपराधिक गतिविधियों में उसकी संलिप्तता के कारण उसे कानूनी कार्यवाही के लिए रायपुर से झारखंड लाया जा रहा था। जेल में रहने के बावजूद अमन साहू सलाखों के पीछे से सक्रिय रूप से अपना गिरोह चला रहा था। उसका प्रभाव तब स्पष्ट हुआ जब मुठभेड़ से ठीक 15 घंटे पहले उसका फेसबुक प्रोफाइल अपडेट किया गया। उसका गिरोह कई हिंसक अपराधों से जुड़ा था, जिसमें हाल ही में रांची में एक कोयला व्यापारी पर हमला भी शामिल है। झारखंड के डीजीपी ने पुष्टि की कि साहू का गिरोह जेल से भी सक्रिय था और राज्य भर में कई आपराधिक गतिविधियों में शामिल था। हजारीबाग में एनटीपीसी से जुड़े एक मामले में भी उसका नाम सामने आया था।
झारखंड का सबसे बड़ा गैंगस्टर अमन साहू
अमन साहू के लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से संबंध होने की खबर है। उसके खिलाफ 100 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। झारखंड के ही आठ पुलिस थानों में 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, खास तौर पर रांची, पलामू, धनबाद, हजारीबाग, लातेहार, बोकारो, रामगढ़ और चतरा में। उसके कामों में जबरन वसूली, अवैध वसूली और व्यापारियों, कोयला व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों, बिल्डरों और ठेकेदारों को निशाना बनाना शामिल था।
