क्राइम

नशे की पुड़िया के लिए हुआ प्यार और फिर 'स्मैकिया कपल' बन गए चेन स्नैचर, दिन में लूटपाट और रात को श्मशान में धुआं

Jaipur Crime: आरोपी अरुण उर्फ काकू और कोमल मौर्या दोनों को स्मैक की लत है। अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए वे चेन स्नैचिंग और लूटपाट जैसी वारदातों को अंजाम देते थे और रात में सूनसान इलाके की तलाश में श्मशान पहुंच जाते थे। यहां वे रातभर नशा करते थे।

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Jaipur Crime

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Jaipur Crime: राजस्थान की जयपुर पुलिस ने नशे के आदी एक कपल को गिरफ्तार किया है। ये कपल दिन में चेन स्नैचिंग, लूटपाट और चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था। रात होते ही श्मशाम पहुंचकर नशा करता था। पुलिस ने बताया कि चेन स्नैचिंग के लिए बॉयफ्रेंड बाइक चलाता था और पिछली सीट पर बैठी गर्लफ्रेंड झपट्टा मारकर राहगीरों के मोबाइल, चेन व अन्य सामान लेकर फरार हो जाती थी। पुलिस ने बताया कि बॉयफ्रेंड और उसकी गर्लफ्रेंड ने नशे की हालत में कितनी वारदातें की हैं, उनका भी उन्हें होश नहीं है।

पुलिस ने बताया कि आरोपियों की पहचान अरुण उर्फ काकू और उसकी गर्लफ्रेंड कोमल मौर्या के रूप में हुई है। दोनों चेन स्नैचिंग, लूट और चोरी की घटनाओं में फरार चल रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इस कपल ने हाल ही में 7 जुलाई को मानसरोवर इलाके में विमला जैन नामक महिला से भी चेन स्नैचिंग की थी। सीसीटीवी फुटेज से दोनों की पहचान हुई, जिसके बाद इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

दोनों आरोपियों को स्मैक की लत

पुलिस ने बताया कि आरोपी अरुण उर्फ काकू और कोमल मौर्या दोनों को स्मैक की लत है। अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए वे इन वारदातों को अंजाम देते थे और रात में सूनसान इलाके की तलाश में श्मशान पहुंच जाते थे। यहां दोनों रातभर नशा करते थे और अगली सुबह फिर बाइक पर सवार होकर नए शिकार की तलाश में जुट जाते।

कोमल मौर्या की हो चुकी है शादी

अधिकारियों ने बताया कि आरोपी युवती कोमल मौर्या की कुछ साल पहले शादी हुई थी, लेकिन वह अपने पति को छोड़कर जयपुर आ गई। यहां वह एक ब्यूटी पार्लर में नौकरी करने लगी, लेकिन धीरे-धीरे उसे स्मैक की लत लग गई। इस कारण उसे पार्लर की नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा। जानकारी के मुताबिक, इसी दौरान उसकी दोस्ती अरुण से हुई और दोनों में प्यार हो गया। दोनों के नशे की लत के कारण अपने-अपने घर से भी निकाल दिया गया। इसके बाद नशे की जरूरत को पूरा करने के लिए दोनों ने क्राइम का रास्ता चुना।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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