क्राइम

अतीक अहमद के बेटे अली अहमद की जमानत अर्जी खारिज, कोर्ट ने बताया- जेल से बाहर आना समाज के लिए खतरा

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Mar 3, 2023, 09:48 PM IST

हत्या के कथित प्रयास और फिरौती के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अतीक अहमद के बेटे अली अहमद की जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि अगर वह जेल से बाहर आता है तो गवाह और समाज के लिए खतरा होगा।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के कथित प्रयास और फिरौती के एक मामले में अतीक अहमद के बेटे अली अहमद की जमानत अर्जी खारिज करते हुए उसे माफिया डॉन बताया जिसका उमेश पाल हत्या मामले में नाम सामने आया है। कोर्ट ने कहा कि इसलिए यदि वह जेल से बाहर आता है तो वह गवाह और समाज के लिए खतरा होगा। जस्टिस दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि माफिया डॉन अतीक अहमद और उसके परिवार ने अपराध की कमाई से कई 100 करोड़ रुपए की संपत्ति अर्जित की है। अली अहमद खुद एक माफिया डॉन है क्योंकि उमेश पाल की हत्या में उसकी भूमिका सामने आई है।

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता दुर्दांत अपराधी, बाहुबली और माफिया डॉन अतीक अहमद का बेटा है और अतीक पर हत्या, अपहरण, फिरौती, संपत्ति हड़पने तथा अन्य जघन्य अपराधों के सौ से अधिक मामले दर्ज हैं। खुद याचिकाकर्ता पर अन्य तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसने कहा कि हाल ही में विधायक राजू पाल की हत्या के मामले में मुख्य गवाह उमेश पाल की दिन दहाड़े नृशंस हत्या में आरोपी याचिकाकर्ता का नाम सामने आया है। राजू पाल की भी दिनदहाड़े इसके (अली के) पिता ने अन्य अभियुक्तों के साथ मिलकर कथित तौर पर हत्या कर दी थी। इस घटना में राजू पाल और अन्य तीन व्यक्तियों की मृत्यु हुई थी।

कोर्ट ने कहा कि इसके अलावा, उमेश पाल और उसके दो सुरक्षाकर्मियों की हत्या के संबंध में प्रयागराज के धूमनगंज थाने में 25 फरवरी, 2023 को आरोपी याचिकाकर्ता और अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मौजूदा जमानत याचिका अली अहमद के खिलाफ 31 दिसंबर, 2022 को प्रयागराज के करेली थाने में आईपीसी की धारा 307, 386 और अन्य धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर से जुड़ी है।

अली अहमद की जमानत याचिका खारिज करते हुए अदालत ने 27 फरवरी के अपने आदेश में कहा कि इस मामले के संपूर्ण तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए तथा लगाए गए आरोपों एवं आरोपी याचिकाकर्ता के पूर्व के आपराधिक कृत्यों को देखते हुए यह अदालत उसे जमानत पर रिहा करने का कोई आधार नहीं पाती।

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