AI Deepfake Fraud: अहमदाबाद पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच ने बुधवार को चार लोगों को गिरफ्तार किया, जिन पर आरोप है कि उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का इस्तेमाल करके एक बिजनेसमैन के डीपफेक (AI deepfake) वीडियो बनाए और आधार बायोमेट्रिक जांच को दरकिनार करते हुए फर्जी लोन हासिल किया। यह सब बिना किसी ओटीपी ( OTP) अलर्ट को ट्रिगर किए किया गया।
धोखाधड़ी के इस्तेमाल से जांचकर्ता हैरान
गिरफ्तार किए गए चारों लोगों की पहचान कनुभाई परमार, आशीष वनंद, मोहम्मद कैफ पटेल और दीप गुप्ता के रूप में हुई है। जांचकर्ताओं ने कहा कि वे धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए तरीके की जटिलता से हैरान हैं। यह मामला तब सामने आया जब शहर के एक कारोबारी ने देखा कि उसे दो दिनों से अपने बैंक से ओटीपी नहीं मिल रहे हैं। कुछ गड़बड़ महसूस होने पर उसने पुलिस से संपर्क किया।
जांचकर्ताओं ने पाया कि उनके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर को ओटीपी सत्यापन के बिना बदल दिया गया था और उसके बायोमेट्रिक डेटा के साथ छेड़छाड़ की गई थी। बाद में उनके नाम पर एक बैंक खाता खोला गया, उससे 25,000 रुपये का लोन लिया गया और उनके डिजिलॉकर खाते से संग्रहीत दस्तावेज निकाले गए।
गिरोह ने कैसे अंजाम दिया?
गिरोह ने पीड़ित के डीपफेक वीडियो बनाने के लिए गूगल के जेमिनी एआई टूल का इस्तेमाल किया। इनका इस्तेमाल आधार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को दरकिनार करने और उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर को बदलने के लिए किया गया, जिससे सभी ओटीपी आरोपियों द्वारा नियंत्रित एक नंबर पर रीडायरेक्ट हो गए। गिरफ्तार किए गए लोगों में से एक कॉमन सर्विस सेंटर में काम करता था और उसने कथित तौर पर आधार सिस्टम और सरकारी किट तक अपनी पहुंच का दुरुपयोग करके मोबाइल नंबर बदलने का काम किया।
व्यापारी के आधार नंबर और अन्य व्यक्तिगत डेटा का इस्तेमाल करके गिरोह ने ई-केवाईसी के जरिए तीन बैंकों में खाते खोलने का प्रयास किया। उन्होंने जियो पेमेंट्स बैंक के जरिए 25,000 रुपये का ऋण लिया और उन्हें सफलता मिली।
ऐसी ठगी बचने के लिए क्या करें?
यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि आधार धारकों को सक्रिय उपयोग में न होने पर UIDAI पोर्टल के जरिए अपने बायोमेट्रिक डेटा को लॉक कर देना चाहिए, जिससे निजी जानकारी लीक होने की स्थिति में भी दुरुपयोग की संभावना कम हो जाती है।
