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यहां है दुनिया में सबसे ऊंचाई पर मौजूद कृष्ण मंदिर, पहाड़ों के साथ होते हैं कान्हा के दर्शन

Janmashtami: मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी की धूम अलग ही होती है। लेकिन दुनियाभर में कई ऐसे मंदिर हैं, जहां श्रद्धालुओं जन्माष्टमी पर अद्भुत अनुभव करते हैं। ऐसा ही एक मंदिर 12 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद है। चलिए जानते हैं सबसे ऊंचाई पर मौजूद कृष्ण मंदिर के बारे में

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ये है सबसे ऊंचाई पर मौजूद श्रीकृष्ण को समर्पित मंदिर

Janmashtami: आज यानी शुक्रवार 4 सितंबर 2026 को देश और दुनियाभर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। 'जन्माष्टमी' के अवसर पर श्रद्धालुओं व्रत रखते हैं और आज देर रात तक जागकर, श्रीकृष्ण मंदिरों में दर्शन करते हैं। रात 12 बजे कृष्ण जन्म के बाद ही श्रद्धालु अपना व्रत पूरा करते हैं। इस अवसर पर सभी छोटे-बड़े मंदिरों को खूब सजाया जाता है और बड़ी संख्या में भक्त इन मंदिरों में पहुंचते हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े मथुरा, वृंदावन भी पहुंचते हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर मथुरा-वृंदावन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है। चलिए आपको लेकर चलते हैं श्रीकृष्ण के ऐसे मंदिर में, जो सबसे ज्यादा ऊंचाई पर है। लेकिन यहां भी जन्माष्टमी की खूब धूम होती है।

सबसे ऊंची जगह पर कहां है ये कृष्ण मंदिर

जिस कृष्ण मंदिर की हम बात कर रहे हैं, वह हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में है। किन्नौर में जिस जगह यह मंदिर है, उसका नाम यूला कांडा है। हिमालय की ऊंची-ऊंची और प्राकृतिक सुंदरता के बीच मौजूद कृष्ण मंदिर में दर्शन का अपना अलग ही अनुभव होता है। यहां की भौगोलिक स्थिति और धार्मिक मान्यताओं के लिए यह मंदिर खास स्थान रखता है। बता दें कि यह मंदिर समुद्र तल से 12000 फीट (लगभग 3657 मीटर) की ऊंचाई पर मौजूद है।

12 किमी का ट्रैक और अद्भुत खूबसूरती

हिमाचल प्रदेश सरकार के पर्यटन संबंधी दस्तावेजों के मुताबिक युला गांव से इस कृष्ण मंदिर तक लगभग 12 किमी का ट्रैक है। इस खूबसूरत ट्रैक का आनंद लेते हुए आप जब मंदिर तक पहुंचते हैं तो यहां सिर्फ कृष्ण भक्ति ही नहीं, अद्भुत खूबसूरती भी देखने को मिलती है। यहां एक खूबसूरत झील है, जिसके केंद्र में श्रीकृष्ण को समर्पित यह मंदिर है। इस मंदिर को दुनिया के सबे ऊंचाई पर मौजूद कृष्ण मंदिरों में से एक माना जाता है।

बता दें कि यूला कांडा हिमाचल प्रदेश में किन्नौर की रोरा घाटी में है। मंदिर तक पहुंचने के लिए 12 किमी का ट्रैक आसान तो नहीं है, लेकिन यहां के जंगल, घास के मैदान और ऊंची-ऊंची चोटियां आपकी यात्रा को यादगार के साथ ही आसान भी बना देती हैं।

सबसे ऊंचाई पर मौजूद मंदिर की मान्यता क्या है?

यूला कांडा स्थित इस कृष्ण मंदिर और झील को लेकर स्थानीय स्तर पर कई पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि द्वापर युग में वनवास या अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां कुछ समय बिताया था। इसी दौरान पांडवों ने यहां पर झील का निर्माण किया था। पांडवों की बनाई इस झील के बीच में भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर भी बनाया गया।

यहां की जन्माष्टमी होती है खास

मथुरा-वृंदावन की तरह ही यूला कांडा की जन्माष्टमी भी खास होती है। हर साल जन्माष्टमी के अवसर पर किन्नौर के साथ ही हिमाचल प्रदेश के दूसरे हिस्सों और अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। हर साल की तरह इस बार भी मंदिर में जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जा रही है। यहां पहुंचने वाला श्रद्धालु न सिर्फ झील के बीच स्थित कृष्ण मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि स्थानीय किन्नौरी संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों का भी आनंद लेते हैं।

टोपी और भविष्यवाणी का क्या है कनेक्शन

यूला कांडा की सबसे अनोखी परंपराओं में टोपी से भविष्य के संकेत जानने की है। जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धालु अपनी टोपी को झील से जुड़ी जलधारा में छोड़ देते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अगर टोपी सुरक्षित तरीके से आगे निकल जाए तो यह शुभ संकेत माना जाता है। अगर टोपी डूब जाए तो इसे अशुभ संकेत के तौर पर देखा जाता है।

कितना दूर है यूला कांडा का ये मंदिर

यूला कांडा कृष्ण मंदिर जाने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा शिमला है। शिमला से किन्नौर के लिए टैक्सी आसानी से मिल जाती हैं। यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन देहरादून और शिमला हैं। शिमला और रामपुर से किन्नौर के लिए नियमित तौर पर बसें व टैक्सी मिल जाती हैं। लाहौल और स्पीति से भी किन्नौर जा सकते हैं। बता दें कि यहां जाने का यह सबसे अच्छा मौसम है। मई से नवंबर तक यहां मौसम अच्छा रहता है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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