Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सर-संघचालक मोहन भागवत गुरुवार को ब्रिटेन पहुंचे। अपनी तीन देशों की यात्रा के वह अंतिम पड़ाव पर हैं। इससे पहले उन्होंने कनाडा और अमेरिका का अपना दौरा पूरा किया। आरएसएस अपनी स्थापना का शताब्दी समारोह मना रहा है। इसी क्रम में आरएसएस प्रमुख दुनिया में संघ के दर्शन एवं सोच को रख रहे हैं। समझा जाता है कि सप्ताह के अंत में वह लंदन में भी प्रवासी भारतीयों के एक बड़े कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।
भागवत के ब्रिटेन पहुंचने पर कंजरवेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने उनका स्वागत किया है। X पर अपने एक पोस्ट में बॉब ने कहा कि संघ के भविष्य पर आरएसएस प्रमुख की बातों को सुनने के लिए वह अत्यंत उत्सुक हैं। उन्होंने कहा, 'आरएसएस के भविष्य पर उनके विचारों एवं बातों को सुनने के लिए मैं बहुत ही उत्सुक हूं। उन्हें सुनना एक सुखद अनुभव होगा।' इससे पहले 29 अगस्त को आरएसएस प्रमुख ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डेन में प्रवासी भारतीयों सहित अन्य लोगों को संबोधित किया।
न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी ने किया विरोध
अमेरिका में उनकी इस यात्रा को लेकर विवाद और विरोध हुआ। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने आरएसएस प्रमुख के कार्यक्रम का विरोध किया। ममदानी ने कहा कि वह एक ऐसे भारत को जानते हैं जो विविध और समावेशी है लेकिन अभी भारत में एक ऐसा आंदोलन उठ खड़ा हुआ है जो विभाजनकारी है। न्यूयॉर्क के मेयर ने यह भी कहा कि निजी कार्यक्रम की इजाजत रद्द करने का अधिकार उनके कार्यालय के पास है या नहीं, इसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। हालांकि, ममदानी के इस विरोध के बावजूद आरएसएस प्रमुख का कार्यक्रम एमएसजी में हुआ।
दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है संघ
इस हफ्ते भागवत की ब्रिटेन यात्रा की शुरुआत में 'हिंदू काउंसिल यूके’, 'हिंदू फोरम ऑफ ब्रिटेन’, 'हिंदू स्वयंसेवक संघ यूके’ और 'इनसाइट यूके’ जैसे संगठनों ने एक संयुक्त बयान जारी किया। उन्होंने कहा, 'संघ दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है, जो चरित्र निर्माण, स्वयंसेवा, नेतृत्व, सामाजिक एकजुटता और वैश्विक भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।’ बयान के अनुसार, आरएसएस अपने बड़े पैमाने पर किए जाने वाले सामाजिक कार्यों, समानता को बढ़ावा देने, दूर-दराज और दुर्गम इलाकों में शिक्षा पहुंचाने और प्राकृतिक आपदाओं के समय सबसे पहले मदद के लिए पहुंचने वाले संगठन के तौर पर जाना जाता है।
ब्रिटिश-भारतीय मंत्री नादिया ने जताई आपत्ति
इसमें कहा गया है, 'हम संघ के शताब्दी वर्ष के मौके पर डॉ. भागवत के नेतृत्व में पांच तरह के बदलाव लाने की कोशिशों का स्वागत करते हैं, जो हमारे सभी समुदायों के लिए अहम हैं: सामाजिक सद्भाव और एकता; समाज में परिवार की अहमियत; निस्वार्थ सेवा; पर्यावरण की देखभाल; और नागरिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन।’ पिछले हफ्ते, ब्रिटिश-भारतीय मंत्री नादिया व्हिटोम ने संसद में ब्रिटिश गृह कार्यालय से सवाल पूछा था कि क्या विभाग ने 'नफरती भाषण देने वाले लोगों और चरमपंथियों को ब्रिटेन में आने से रोकने संबंधी देश की प्रतिबद्धता’के तहत इस दौरे का पूरी तरह से आकलन किया है।
मंत्री जार्विस ने जवाब दिया कि हालांकि, गृह कार्यालय किसी खास मामले पर टिप्पणी नहीं कर सकता, लेकिन वह 'सभी तरह के खतरों’से निपटने और 'ऐसे किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है जो हिंसा और नफरत को बढ़ावा देने वाले विचार फैलाते हैं। उन्होंने कहा, 'ब्रिटेन में आने वाले सभी लोगों को आव्रजन नियमों की शर्तों को पूरा करना होगा।’
