क्या आप नेता राघव चड्ढा बीजेपी ज्वाइन करने वाले हैं? ये अटकलें देश की राजनीतिक गलियारों में जोरों से गूंज रही है। आम आदमी पार्टी की ओर से भी ऐसे कुछ दावे किए गए हैं, जिससे इन अटकलों को जोर मिल रहा है। आप नेता सौरभ भारद्वाज ने दावा किया है कि राघव चड्ढा बीजेपी से जुड़े उन सभी पोस्ट को डिलीट कर दिया है, जिसमें उन्होंने भाजपा और पीएम मोदी की आलोचना की थी।
सौरभ भारद्वाज ने क्या-क्या दावे किए?
दिल्ली के आम आदमी पार्टी के प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने एक्स पर पोस्ट कर राघव चड्ढा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा- राघव चड्ढा ने X पर अपनी वे सभी पुरानी पोस्ट डिलीट कर दी हैं, जिनमें उन्होंने मोदी या BJP की आलोचना की थी। X पर कुछ लोगों के सुझाव पर, मैंने राघव की टाइमलाइन पर "BJP" या "Modi" शब्द खोजे। वहां आलोचना वाली कोई भी पोस्ट मौजूद नहीं है। इसका मतलब है कि उन्होंने अपनी सभी पुरानी पोस्ट भी डिलीट कर दी हैं। "Modi" शब्द वाली केवल दो पोस्ट ही वहाँ हैं, और वे दोनों ही मोदी की तारीफ में हैं।"
क्या बीजेपी में जाएंगे राघव चड्ढा?
भारद्वाज ने कहा, "एक समय में मोदी-भाजपा के तीखे आलोचक रहे राघव चड्ढा ने अपनी पुरानी छवि को पूरी तरह मिटाकर एक नयी, चमकदार वाशिंग मशीन वाली तस्वीर पेश कर दी है।’’ उन्होंने कहा कि जिस तरह से चड्ढा की ’टाइमलाइन’ में व्यवस्थित रूप से बदलाव किया गया है, वह इसके पीछे की तैयारी के स्तर को दर्शाता है।
राघव चड्ढा पर आप के आरोप
भारद्वाज के आरोपों पर चड्ढा की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। ये आरोप आप और राज्यसभा सदस्य के बीच जारी विवाद के दौरान आए हैं। यह विवाद गुरुवार को राज्यसभा में पार्टी द्वारा चड्ढा को उपनेता पद से हटाए जाने के बाद खुलकर सामने आया। राघव चड्ढा पर आप ने आरोप लगाए हैं कि वो पार्टी के मुद्दे संसद में नहीं उठा रहे थे।
पंजाब के नेताओं ने भी लगाए आरोप
आम आदमी पार्टी ने शनिवार को संसद में पंजाब से जुड़े अहम मुद्दों को उठाने में कथित तौर पर विफल रहने पर राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी ’निष्क्रियता’ पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ है। एक संयुक्त बयान में पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, आप के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा और पार्टी नेता कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि कई अहम मामलों पर चड्ढा की चुप्पी ’निराशाजनक’ है। चीमा ने कहा कि पंजाब के विधायकों द्वारा राज्यसभा के लिए चुने गए चड्ढा से राष्ट्रीय स्तर पर राज्य के मुद्दों का सशक्त प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद थी, लेकिन उन्होंने इससे जुड़ा ’एक भी संवेदनशील मुद्दा’ नहीं उठाया।
