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'अब जब कोर्ट ने...' केजरीवाल को 'दिल्ली एक्साइज पॉलिसी' मामले में कोर्ट से राहत मिलने पर क्या बोले अन्ना हजारे

Delhi Excise Policy Case: सोशल एक्टिविस्ट अन्ना हजारे ने शुक्रवार को कहा कि राउज़ एवेन्यू कोर्ट का फैसला, जिसमें कहा गया है कि दिल्ली एक्सरसाइज पॉलिसी केस में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दूसरों की कोई गलती नहीं थी, उसे मानना ​​चाहिए।

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सोशल एक्टिविस्ट अन्ना हजारे और केजरीवाल (फाइल फोटो: facebook)

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल को एक्साइज पॉलिसी मामले (Delhi Excise Policy Case) में बरी करने के अदालत के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश अपनी न्यायपालिका की मजबूती के कारण सुचारू रूप से काम कर रहा है।

कोर्ट ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील एक्साइज पॉलिसी केस में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को बरी कर दिया।

न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने अन्ना हजारे के हवाले से कहा, 'हमारा देश अपने ज्यूडिशियल और सिक्योरिटी सिस्टम की ताकत पर चलता है। अलग-अलग पार्टियों, जातियों, धर्मों और समुदायों वाला इतना बड़ा देश होने के बावजूद, यह ज्यूडिशियरी की वजह से आसानी से काम करता है। इसके बिना, अफरा-तफरी और अशांति होगी। अब जब कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है कि अरविंद केजरीवाल की कोई गलती नहीं है, तो इसे मानना चाहिए।'

राजनीतिक रूप से संवेदनशील एक्साइज पॉलिसी मामले में बरी

कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य को राजनीतिक रूप से संवेदनशील एक्साइज पॉलिसी मामले में बरी कर दिया, और कहा कि CBI पॉलिसी के पीछे कोई 'बड़ी साजिश या आपराधिक इरादा' साबित करने में नाकाम रही है। इस मामले में बरी हुए लोगों में तेलंगाना जागृति की प्रेसिडेंट के कविता भी शामिल थीं, जिन्हें भी राहत दी गई।

केजरीवाल एवं मनीष सिसोदिया को आरोपमुक्त कर दिया

दिल्ली के कथित शराब घोटाला मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एवं पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को आरोपमुक्त कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इन दोनों नेताओं पर साजिश रचने के जो आरोप लगे थे, वे सही साबित नहीं हुए और आरोप 'न्यायिक समीक्षा की कसौटी पर खरे नहीं उतरे।'

राउज एवेन्यू कोर्ट के जज जितेंद्र सिंह ने अपने आदेश में कहा है कि जांच एजेंसी की ताकत और किसी व्यक्ति के जीवन और निजी आजादी के अधिकार के बीच संतुलन बनाना संविधान की सीधी मांग है। यह किसी कानून की मेहरबानी नहीं है। अदालत ने साफ कहा कि अगर यह संतुलन बिगड़ता है तो कानून का राज कमजोर होता है और आपराधिक न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा भी डगमगा सकता है।

कहीं भी अन्याय हर जगह न्याय के लिए खतरा

कोर्ट ने अपने आदेश में अमेरिका के नागरिक अधिकारों के लिए लड़ने वाले मार्टिन लूथर किंग (जूनियर) के शब्दों का जिक्र किया और कहा कि कहीं भी अन्याय होगा तो वह हर जगह न्याय के लिए खतरा बनेगा। अदालत ने यह भी कहा कि न्याय किया जाए चाहे उसके लिए कितनी भी मुश्किल क्यों न उठानी पड़े। न्यायालय का काम किसी एक कहानी को सही ठहराना या आसान रास्ता चुनना नहीं है। उसका काम सिर्फ कानून का पालन कराना है।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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