विशाखापट्टनम को प्यार से वाइजैग भी कहते हैं। बंगाल की खाड़ी के पास बसे इस शहर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यह शहर अब पर्यटन की दुनिया में एक और नई ऊंचाई को छूने वाला है। अगले हफ्ते यहां कैलाशगिरि पहाड़ियों पर देश का सबसे लंबा ग्लास स्काइवॉक ब्रिज खुलने जा रहा है। यह स्काइवॉक बंगाल की खाड़ी, शहर के स्काईलाइन और ईस्टर्न घाट की अद्भुत झलक पेश करेगा।
स्काइवॉक ब्रिज की इस आकर्षक परियोजना ने मशहूर इंडस्ट्रियलिस्ट आनंद महिंद्रा का भी ध्यान खींचा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बरसात के दिन का एक शानदार वीडियो शेयर किया है। इसमें उन्होंने स्काइवॉक को अत्यंत मनमोहक बताया। आनंद महिंद्रा ने कहा कि इसे सबसे ऊंचे और लंबे स्काइवॉक में गिना जा रहा है, जिसका वर्टिकल ड्रॉप 262 मीटर है। हालांकि, उन्होंने मजाकिया अंदाज में ये भी स्वीकार किया कि ऊंचाइयों से उनका रिश्ता थोड़ा जटिल है, इसलिए वे स्वयं इसे देखने नहीं जाएंगे।
55 मीटर लंबे इस ब्रिज को प्रतिष्ठित टाइटैनिक व्यू पॉइंट के पास बनाया गया है। यह समुद्र तल से 1,000 फीट ऊपर और जमीन से 862 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां से वाइजैग शहर, समुद्र और पहाड़ियों का बर्ड आई व्यू नजारा मिलता है।
सुरक्षा की दृष्टि से इस ब्रिज को जर्मन-निर्मित टेम्पर्ड लेमिनेटेड ग्लास और स्टील से बनाया गया है। ब्रिज में 40 मिलिमीटर मोटाई की तीन ग्लास परतें हैं और इसे 40 टन स्टील का सहारा दिया गया है। यह ब्रिज 500 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर का भार सह सकता है और 250 किमी प्रति घंटे तक की हवाओं को झेल सकता है। हालांकि, एक समय में सिर्फ 40 लोगों को ही 5-10 मिनट के लिए ब्रिज पर जाने की अनुमति होगी। इसके लिए प्रति व्यक्ति 250-300 रुपये टिकट रखी जाएगी, जिससे यह घरेलू और विदेशी दोनों पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।
SSM शिपिंग एंड लॉजिस्टिक्स (वाइजैग) और भारत माता वेंचर्स (केरल) ने PPP के तहत मिलकर इसका निर्माग किया है। वाइजैग महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (VMRDA) भी इसका हिस्सा है। 55 मीटर लंबा यह स्काइवॉक केरल के वागामोन ग्लास ब्रिज (38 मीटर) से लंबा है, और देश का सबसे लंबा ग्लास स्काइवॉक है।
रात में यह ब्रिज तिरंगे की रोशनी से जगमगाएगा, जिसका काम फिलहाल अंतिम चरण में है। इसके उद्घाटन के बाद यह न सिर्फ वाइजैग पर्यटन की पहचान बनेगा, बल्कि एडवेंचर और प्राकृतिक सौंदर्य के दीवानों के लिए स्वर्ग साबित होगा। आनंद महिंद्रा के शब्दों में कहा जाए तो, यह सचमुच अद्भुत है।
