वाराणसी

जन प्रतिनिधियों ने 'धोखा दिया', सरकार ने नहीं बनाया तो ग्रामीणों से सेल्फ फंडिंग करके शुरू करवाया ब्रिज का काम

जन प्रतिनिधि जब जनता से मुंह फेर लें, अधिकारी भी सिर्फ आश्वासन देकर रह जाएं तो फिर जनता के पास कोई रास्ता नहीं बचता। ऐसा ही कुछ हुआ यूपी के गाजीपुर में, जहां 50 से ज्यादा गांवों के लोगों को नदी पर ब्रिज बनाने के लिए क्राउड फंडिंग का सहारा लेना पड़ा

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पैसा इकट्ठा कर ब्रिज बनवा रहे ग्रामीण

Photo : Twitter

जनता चाहे तो क्या नहीं कर सकती। पद के नशे में चूर अधिकारी जब काम नहीं करते तो जनता फिर अपनी ताकत दिखाती है। जब जनता अपने हाथ में किसी काम को लेती है तो फिर उसके सामने सीमाएं नहीं होतीं। ऐसा ही कुछ हुआ है उत्तर प्रदेश के गाजिपुर जिले में। यहां मगई नदी के ऊपर 108 फीट ऊंचा ब्रिज बनाया जा रहा है। ब्रिज निर्माण का काम अभी चल ही रहा है। लेकिन बड़ी बात ये है कि इसमें प्रशासन का कोई हाथ नहीं है। बल्कि ग्रामीणों ने क्राउड फंडिंग के जरिए 1 करोड़ रुपये इकट्ठा करके इस ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू करवाया है।

अधिकारियों ने बार-बार इस ब्रिज को बनाने का आश्वासन तो दिया, लेकिन कभी जमीन पर काम नहीं किया। इससे तंग आकर स्थानीय निवासियों ने इस पूरे मैटर को अपने हाथ में लिया और पिछले कुछ महीनों में स्थानीय लोगों ने दिन-रात एक करके 1 करोड़ रुपये का चंदा जुटाकर इस प्रोजेक्ट के लिए फंड जुटाया है।

ब्रिज की आधारशिला पिछले ही वर्ष फरवरी में रखी गई थी और अब इसका निर्माण कार्य पूरे जोर-सोर से चल रहा है। ग्रामीणों की इस पहल पर भी प्रशासन की टेड़ी निगाह है। पहले तो प्रशासन ने ग्रामीणों की सुविधा के लिए ब्रिज निर्माण का काम नहीं किया और सिर्फ आश्वासन देते रहे। अब प्रशासन ने ब्रिज के निर्माण को लेकर चिंता जाहिर की है, क्योंकि इसके लिए उनसे मंजूरी नहीं ली गई है। ब्रिज की क्वालियी और स्टैंडर्ड को लेकर प्रश्न उठाए जा रहे हैं।

फिलहाल ग्रामीणों के दान से मिलने वाली राशि से ब्रिज के दो पिलर बनकर तैयार हो चुके हैं। ब्रिज के दोनों तरफ अप्रोच रोड भी तैयार हो चुकी है और आधे स्लैब का कार्य भी कर लिया गया है। स्थानीय निवासी राजेश सिंह यादव ने NDTV से बात करते हुए कहा कि आजादी के बाद से अब तक हर जन प्रतिनिधि ने यहां के लोगों को ठगा ही है। यही कारण है कि यहां पर आज तक ब्रिज निर्माण नहीं हुआ। लोग हर बार मतदान करते हैं और फिर उन्हें एहसास होता है कि उनका जन प्रतिनिधि तो उनके लिए काम ही नहीं कर रहा। इस ब्रिज के बन जाने से कम से कम 50 गांवों के लोगों को लाभ मिलेगा। अगर यह ब्रिज बन जाता है तो जिला मुख्यालय से इन गांवों की दूरी 25 किमी तक कम हो जाएगी।

एक अन्य ग्रामीण का कहना है कि ब्रिज नहीं होने की वजह से ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा पर भी असर पड़ा है। उनका कहना है कि यहां नजदीक में कोई भी डिग्री कॉलेज नहीं है, जिसके कारण चात्रों को उच्च शिक्षा के लिए गाजिपुर जाना पड़ता है और इसमें बहुत ज्यादा समय चला जाता है। ज्ञात हो कि जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (Jammu and Kashmir Lieutenant Governor Manoj Sinha) का गांव भी इसी क्षेत्र में है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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