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गंगा में इफ्तारी करने वालों को कोर्ट ने नहीं दी जमानत, 14 आरोपियों को 14 दिन की हिरासत; मांगी क्रिमिनल हिस्ट्री

वाराणसी की एक अदालत ने गंगा नदी पर नाव में इफ्तार पार्टी और चिकन बिरयानी खाने के मामले में 14 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले की गंभीरता और आरोपों को देखते हुए यह फैसला लिया। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं और जांच जारी है।

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गंगा नदी में नाव पर बिरयानी खाने वाले आरोपियों की जमानत याचिका खारिज (सांकेतिक फोटो)

Varanasi Ganga River Iftar Party Case: वाराणसी की एक अदालत ने गंगा नदी पर नाव में इफ्तार पार्टी करने और चिकन बिरयानी खाने के मामले में 14 आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। वादी पक्ष के वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने बताया कि अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित कुमार यादव ने सोमवार को सभी 14 आरोपियों की जमानत अर्जी अस्वीकार कर दी।

अदालत ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए और आरोप गैर-जमानती होने के कारण इस समय जमानत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है। वादी पक्ष के वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने बताया कि आरोपियों पर धार्मिक भावनाओं को भड़काने, सार्वजनिक उपद्रव, जल प्रदूषण समेत कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके बाद पुलिस ने जबरन नाव लेने से संबंधित धारा को भी प्राथमिकी में शामिल किया। उन्होंने यह भी बताया कि सभी 14 आरोपी वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। अदालत ने 19 तारीख को सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था और उनके परिजनों ने उसी दिन जमानत अर्जी दायर की थी। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोर्ट ने आरोपियों की क्रिमिनल हिस्ट्री पुलिस से मांगी है।

आरोपियों द्वारा किया गया अपराध गंभीर

वादी पक्ष के वकीलों ने अदालत को बताया कि इस मामले में दर्ज प्राथमिकी, केस डायरी और अन्य साक्ष्यों से आरोपियों की भागीदारी स्पष्ट रूप से सामने आती है। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए इस समय आरोपियों को जमानत देना न्याय के हित में नहीं होगा। वहीं, अभियोजन पक्ष ने भी जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि आरोपियों द्वारा किया गया अपराध गंभीर है और इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अगर आरोपियों को जमानत मिलती है, तो इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

जमानत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं

अदालत ने वादी और अभियोजन पक्ष की दलीलों को सुनने और उपलब्ध दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद निष्कर्ष निकाला कि मामले की परिस्थितियां और तथ्य जमानत देने के पक्ष में नहीं हैं। अपने आदेश में अदालत ने उल्लेख किया कि आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप सिद्ध होते हैं और जांच की वर्तमान स्थिति में जमानत देने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है। अदालत ने अंततः सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी और स्पष्ट किया कि प्रकरण की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय न्यायसंगत है।

(इनपुट - भाषा)

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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