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क्या है उत्तराखंड सरकार का 'ऑपरेशन कालनेमि'? किसके खिलाफ शुरु की गई है ये मुहिम

कांवड़ यात्रा शुरू के मद्देनजर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सनातन धर्म की आड़ में लोगों को ठगने और उनकी भावनाओं से खिलवाड़ करने वाले ‘छद्म भेषधारियों’ के खिलाफ 'ऑपरेशन कालनेमि' शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

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उत्तरखांड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर ऑपरेशन कालनेमि' शुरु (फोटो - टाइम्स नाउ नवभारत)

देहरादून: कांवड़ यात्रा शुरू होने से एक दिन पहले बृहस्पतिवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों को सनातन धर्म की आड़ में लोगों को ठगने और उनकी भावनाओं से खिलवाड़ करने वाले ‘छद्म भेषधारियों’ के खिलाफ 'ऑपरेशन कालनेमि' शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि प्रदेश में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां असामाजिक तत्व साधु-संतों का भेष धारण कर लोगों, विशेषकर महिलाओं को ठग रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं बल्कि सामाजिक सौहार्द और सनातन परंपरा की छवि को भी नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे में किसी भी धर्म का व्यक्ति यदि ऐसे कृत्य करता हुआ मिलता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

पाखंड फैलाने वालों की खैर नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार असुर कालनेमि ने साधु का भेष धारण कर भ्रमित करने का प्रयास किया था, वैसे ही आज समाज में कई कालनेमि सक्रिय हैं जो धार्मिक भेष धारण कर अपराध कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार जनभावनाओं, सनातन संस्कृति की गरिमा की रक्षा और सामाजिक सौहार्द बनाये रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आस्था के नाम पर पाखंड फैलाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

सावन शुरु होने से एक दिन पहले आया बयान

धामी का यह बयान श्रावण कांवड़ यात्रा शुरू होने से एक दिन पहले आया है जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से कांवड़िए गंगा जल भरने के लिए हरिद्वार पहुंचते हैं। इस गंगा जल से कांवड़िए अपने गांवों और घरों के शिवालयों में शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। करीब एक पखवाड़े तक चलने वाली इस कांवड़ यात्रा में भाग लेने वाले कांवड़ियों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। पिछले साल कांवड़ यात्रा में चार करोड़ से अधिक कांवड़िए हरिद्वार और ऋषिकेश पहुंचे थे ।

इस बार ज्यादा कांवड़िए आने की उम्मीद

पुलिस और प्रशासन को उम्मीद है कि इस बार और अधिक कांवड़िए आ सकते हैं तथा कांवड़ियों के भेष में अपराधियों के आने की आशंका के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों इस संबंध में एक बैठक कर अधिकारियों को पूर्व के वर्षों की व्यवस्थाओं की समीक्षा कर कानून-व्यवस्था की दृष्टि से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त कदम उठाने के निर्देश दिए थे ताकि इस वर्ष उनकी पुनरावृत्ति न हो।

धामी ने कहा था कि इस विशाल धार्मिक आयोजन में किसी भी प्रकार की तोड़-फोड़, उपद्रव या अन्य अवांछनीय घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा इंतजाम किए जाएं तथा शिविर संचालकों, वहां काम करने वाले व्यक्तियों, स्वयंसेवकों और होटल तथा धर्मशालाओं में ठहरने वाले व्यक्तियों का पूर्ण सत्यापन किया जाए। (भाषा इनपुट)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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