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यूपी में प्रधानों का बढ़ गया कार्यकाल, 2026 में नहीं होंगे पंचायत चुनाव? पहली बार बनाए गए प्रशासक

Uttar Pradesh Panchayat Elections 2026 : यूपी में पंचायत चुनाव टलने के बाद ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ा दिया गया है और अब सदस्य ही बतौर प्रशासक कार्यभार संभालेंगे। हालांकि, प्रशासकों को केवल सामान्य और रूटीन कार्यों के निर्वहन की अनुमति होगी। उनके द्वारा कोई नीतिगत निर्णय पर नहीं लिया जा सकेगा।

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यूपी में प्रधान बने प्रशासक (फोटो-AI)

Uttar Pradesh Panchayat Elections 2026 : प्रदेश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। इसके दृष्टिगत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके साथ ही स्पष्ट किया गया है कि नई ग्राम पंचायतों के गठन अथवा अधिकतम छह माह की अवधि तक निवर्तमान प्रधान ही पंचायतों का सामान्य प्रशासनिक कार्य संभालेंगे।

सीएम योगी के निर्देश पर निवर्तमान प्रधानों को ग्राम पंचायतों में बतौर प्रशासक नामित किए जाने के लिए सभी जिलाधिकारियों को प्राधिकृत किया गया है, जिसके अनुसार 27 मई 2026 से निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे। प्रशासकों को केवल सामान्य और रूटीन कार्यों के निर्वहन की अनुमति होगी। उनके द्वारा कोई नीतिगत निर्णय पर नहीं लिया जा सकेगा।

विशेष परिस्थितियों में लेंगे डीएम से स्वीकृति

इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि अत्यावश्यक अथवा किसी विशेष परिस्थिति में नीतिगत निर्णय लेने की आवश्यकता पड़ती है तो उस प्रस्ताव को जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी के समक्ष रखा जाएगा और उनकी स्वीकृति के बाद ही निर्णय लिया जा सकेगा। ज्ञात है कि ग्राम पंचायत का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई पंचायतों के गठन तक राज्य सरकार को प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार है।

OBC आयोग के गठन को मंजूरी

इधर, पंचायत चुनावों के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग के गठन को मंजूरी मिल गई है। पंचायती राज विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा जारी प्रस्ताव के अनुसार पांच सदस्यीय आयोग की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। मसौदे के अनुसार आयोग में पांच सदस्यों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा ऐसे व्यक्तियों में से की जाएगी, जो पिछड़े वर्गों से संबंधित मामलों का ज्ञान रखते हों।

अब बात आगे बढ़ी है तो OBC आयोग के गठन के साथ ही आरक्षण की प्रक्रिय शुरू हो सकेगी। नया समर्पित आयोग प्रदेश में पिछड़ों का रैपिड सर्वे करेगा और इस सर्वे के जरिए वास्तविक आबादी का पता लगाया जाएगा और उसी के आधार पर सीटों का आरक्षण लागू होगा फिर कहीं जाकर पंचायत चुनाव होंगे। हालांकि, ग्राम प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव तय समय पर अप्रैल-मई में संपन्न हो चाने चाहिए थे, लेकिन पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण प्रक्रिया इस पर बाधा बनी हुई थी।

यूपी में कितनी ग्राम पंचायतें

यूपी में करीब 57691 ग्राम प्रधान, पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, 826 ब्लॉक के प्रमुख, 3200 जिला पंचायत सदस्य और 75 जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव होने हैं। अभी ग्राम पंचायत प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल मई-2026 तक है। इसके अलावा ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल जुलाई-2026 के पहले सप्ताह में खत्म होगा।

कब-कब हुए पंचायत चुनाव

1995

2000

2005

2010

2015

2021

पिछले पंचायत चुनाव अप्रैल-2021 में हुए थे, जिसके चलते माना जा रहा था कि इस साल अप्रैल में पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं, लेकिन ओबीसी आरक्षण प्रक्रिया के लिए समर्पित आयोग न होने से पेंच फंस हुआ था। मामले में हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने योगी सरकार को ओबीसी आयोग बनाने के दिशा-निर्देश दिए थे। इसी मद्देनजर सरकार ने ओबीसी आयोग गठन का फैसला लिया है, जिसके चलते ही पंचायत चुनाव की सबसे बड़ी बाधा खत्म हो गई है।

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Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमार author

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ... और देखें

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