BC Sakhi Scheme Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश की बीसी सखी योजना ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और गांवों तक बैंकिंग सेवाओं को पहुंचाने में देश में सबसे आगे रही है। इस रैंकिंग में मध्य प्रदेश दूसरे और राजस्थान तीसरे स्थान पर हैं। योगी सरकार के निरंतर प्रयासों के चलते इस योजना के माध्यम से प्रदेश की महिलाएं आर्थिक स्वावलंबन के नए रिकॉर्ड बना रही हैं। प्रदेश में लगभग 40,000 महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं और गांवों में सक्रिय होकर न सिर्फ ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर रही हैं, बल्कि खुद भी आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं। इन महिलाओं की औसत आय 10 से 15 हजार रुपये प्रति माह है, जबकि कई बीसी सखियां महीने में 40 से 50 हजार रुपये तक कमीशन भी कमा रही हैं।
बैंकिंग सेवाएं सीधे घर के पास उपलब्ध
उत्तर प्रदेश में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित बीसी सखी (बिजनेस कॉरेस्पांडेंट सखी) कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को मजबूत करने और महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देने का एक प्रभावी तरीका बन गया है। इस योजना के तहत प्रशिक्षित महिलाएं गांवों में माइक्रो एटीएम और डिजिटल उपकरणों के जरिए कैश निकासी, जमा, आधार आधारित भुगतान और अन्य बैंकिंग सेवाएं सीधे घर के पास उपलब्ध करा रही हैं। इस पहल के परिणामस्वरूप ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच तेजी से बढ़ी है और बड़ी संख्या में महिलाएं इस योजना से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं महिलाएं
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त मिशन निदेशक जनमेजय शुक्ला के अनुसार, बीसी सखी योजना के तहत लखनऊ, प्रयागराज, सुल्तानपुर और प्रदेश के अन्य जिलों में महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये महिलाएं गांवों में तैनात की जाती हैं, जिससे ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधाएं अब उनके घर के पास ही मिल रही हैं। यह पहल न केवल ग्रामीण वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बना रही है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर महिला सशक्तिकरण को भी नई दिशा दे रही है। लगातार गांव-गांव महिलाओं को प्रशिक्षित कर इस मॉडल का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
आय के साथ-साथ 50 हजार रुपए तक का कमीशन
लखनऊ की अनीता पाल ने उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की बीसी सखी योजना के माध्यम से आत्मनिर्भरता की एक मजबूत मिसाल कायम की है। इस योजना के तहत उन्हें हर महीने निश्चित आय के साथ-साथ 50 हजार रुपए तक का कमीशन भी प्राप्त होता है। इसी तरह, सुल्तानपुर की प्रियंका मौर्य भी इस योजना के सफल संचालन में सक्रिय हैं और अपने परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्हें भी मासिक आय के अलावा लगभग 50 हजार रुपए का कमीशन मिल रहा है।
समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त मिशन निदेशक जनमेजय शुक्ला ने बताया कि योजना के प्रभाव से उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में महिलाएं आर्थिक स्वावलंबन के रिकॉर्ड बना रहीं हैं। यह मॉडल ग्रामीण भारत में समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बीसी सखी कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए पहले से ही कार्यरत बैंक ऑफ बड़ौदा तथा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ-साथ अब बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, केनरा आदि बैंक भी इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन को सहयोग प्रदान करने के लिए आगे आए हैं।
