UP SIR: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद भाजपा के मजबूत प्रभाव वाले जिलों में मतदाताओं की संख्या में सबसे ज्यादा कमी दर्ज की गई है, जबकि मुस्लिम बहुल जिलों में यह कमी अपेक्षाकृत कम रही है। आंकड़ों के मुताबिक;- लखनऊ, गाजियाबाद, कानपुर, कानपुर नगर, गौतमबुद्धनगर और मेरठ जैसे जिलों में 27 अक्टूबर 2025 की पुरानी सूची की तुलना में मतदाताओं के नाम काटे जाने का प्रतिशत सबसे अधिक रहा।
जहां जीती बीजेपी वहीं कटे ज्यादा वोट
इन जिलों में 18.75 प्रतिशत से लेकर 22.89 प्रतिशत तक वोट घट गए। इन सभी क्षेत्रों में 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ज्यादातर सीटें जीती थीं और लोकसभा चुनाव के लिहाज से भी ये सीटें भाजपा के गढ़ मानी जाती हैं।. राज्य की पांच विधानसभा सीटों पर सबसे ज्यादा नाम कटे हैं, जहां भाजपा के ही विधायक हैं। इनमें साहिबाबाद, नोएडा, लखनऊ उत्तर, आगरा कैंट और इलाहाबाद नॉर्थ शामिल हैं।
मुस्लिम बहुल जिलों में क्या है स्थिति?
वहीं मुस्लिम बहुल जिलों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। संभल में 14.47 प्रतिशत, रामपुर में 12.33 प्रतिशत, मुरादाबाद में 10.09 प्रतिशत, बिजनौर में 9.63 प्रतिशत, शाहजहांपुर में 17.90 प्रतिशत, सहारनपुर में 10.48 प्रतिशत और मुजफ्फरनगर में 10.38 प्रतिशत मतदाता कम हुए।
UP में कुल कितने वोटर?
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने शुक्रवार को कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)-2026 के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में राज्य में 84 लाख से अधिक मतदाताओं की वृद्धि हुई है, जिससे कुल मतदाता संख्या 13.39 करोड़ हो गई है। रिणवा ने कहा कि एसआईआर कार्यक्रम 27 अक्टूबर, 2025 से 10 अप्रैल, 2026 तक आयोजित किया गया था, जिसमें राज्य भर के सभी 75 जिलों, 403 विधानसभा क्षेत्रों और मतदान केंद्रों को शामिल किया गया था। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी अपील की कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के निर्णय से असंतुष्ट कोई भी व्यक्ति लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत अंतिम नामावली के प्रकाशन के 15 दिनों के भीतर जिलाधिकारी के समक्ष पहली अपील दायर कर सकता है। यदि फिर भी असंतुष्ट है, तो जिलाधिकारी के निर्णय के 30 दिनों के भीतर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष दूसरी अपील दायर की जा सकती है।
