UP Power Crisis Update: उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच गहराए बिजली संकट ने अब एक नया और गंभीर रूप अख्तियार कर लिया है। प्रदेश भर में लगातार हो रही भारी कटौती और जनता के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए प्रशासन ने राजधानी लखनऊ के 31 संवेदनशील बिजली उपकेंद्रों पर पीएसी (PAC - प्रादेशिक आर्म्ड कांस्टेबुलरी) के जवान तैनात करने का बड़ा फैसला लिया है। यह निर्णय बिजली व्यवस्था की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में लिया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य रात के समय बिजलीघरों पर होने वाले हमलों को रोकना और ऑन-ड्यूटी बिजली कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करना है।
रात में बिजलीघरों का घेराव और तोड़फोड़: प्रशासन अलर्ट मोड पर
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (MVVNL) के मुताबिक, रात के समय बिजली गुल होने पर कई इलाकों में अराजक तत्वों द्वारा बिजलीघरों का घेराव करने, तोड़फोड़ करने और फॉल्ट ठीक कर रहे तकनीकी कर्मचारियों के साथ मारपीट की घटनाएं सामने आ रही थीं। इसके चलते प्रशासन ने चिनहट, उतरेटिया, राजाजीपुरम, दुबग्गा, हुसैनगंज, चौपटिया, विकासनगर और इंजीनियरिंग कॉलेज समेत कुल 31 सबस्टेशनों को 'अति संवेदनशील' घोषित किया है। आदेश के तहत, बिजली आपूर्ति बहाल करने में बाधा डालने और कर्मचारियों से बदसलूकी करने वाले उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक बिजली व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुख्य अभियंता और मध्यांचल निगम के निदेशक खुद रात में ऑन-ग्राउंड मॉनिटरिंग करेंगे।
लखनऊ से पूर्वांचल तक हाहाकार
यह संकट सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं है। कानपुर, रायबरेली, अमेठी, गोंडा, अयोध्या, गाजियाबाद, बरेली और अलीगढ़ समेत पूर्वांचल के कई जिलों में 8 से लेकर 20 घंटे तक की अघोषित कटौती की शिकायतें मिल रही हैं। 45 डिग्री से अधिक तापमान के कारण लगातार ट्रिपिंग हो रही है। लंबे पावर कट की वजह से लोगों के इनवर्टर जवाब दे चुके हैं, जिससे पीने के पानी की सप्लाई भी पूरी तरह ठप हो गई है। लखनऊ के फैजुल्लागंज, सरोजिनी नगर और लखनऊ पूर्वी के इलाकों में भारी हंगामा हुआ। बुधवार रात फैजुल्लागंज बिजली घर पर 100 से अधिक लोगों की उग्र भीड़ ने जमकर नारेबाजी की, जिसके बाद जेई आकर्ष श्रीवास्तव और अन्य अधिकारियों को भारी दबाव का सामना करना पड़ा। कानपुर में भी पांच घंटे की कटौती के बाद लोगों ने सड़कों पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया।
विधायकों ने उठाया कटौती का मुद्दा
बिजली संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब सत्ता पक्ष के विधायक खुद अपनी ही सरकार के ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा को पत्र लिखने पर मजबूर हो गए हैं। लखनऊ के सरोजनी नगर से भाजपा विधायक राजेश्वर सिंह और लखनऊ पूर्वी से विधायक ओपी श्रीवास्तव ने ऊर्जा मंत्री को विस्तृत पत्र लिखकर लोकल फॉल्ट और ओवरलोडिंग की समस्या को तुरंत दूर करने की मांग की। गोंडा सदर से भाजपा विधायक प्रतीक भूषण शरण सिंह ने पत्र में अपनी बेबसी जाहिर करते हुए लिखा कि “अघोषित कटौती से जनता बेहाल है और अब लोग हमें घेर रहे हैं।” उन्होंने ऊर्जा मंत्री से इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल व्यक्तिगत मुलाकात का समय मांगा है। रायबरेली के सलोन से भाजपा विधायक अशोक कोरी खुद बिजली दफ्तर पहुंचे और अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
विपक्ष का तीखा हमला, सपा प्रमुख ने घेरा
इस संकट को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत भी पूरी तरह गरमा गई है। लखनऊ पश्चिम से सपा विधायक अरमान खान खुद तालकटोरा बिजली घर के बाहर धरने पर बैठ गए। वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर बुनियादी ढांचे को मजबूत न करने का आरोप लगाते हुए बड़ा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार ने पिछले वर्षों में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए कोई ठोस और नई व्यवस्था नहीं की, जिसके चलते आज राज्य की मांग 30,000 मेगावाट के पार पहुंचते ही पूरी ट्रांसमिशन व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। उपभोक्ता कल्याण समिति के अध्यक्ष अवधेश वर्मा का कहना है कि सिर्फ बिजली की कमी ही नहीं, बल्कि मेंटेनेंस में लापरवाही और ट्रांसफार्मर की ओवरलोडिंग इस संकट की असली वजह हैं।
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