Heatwave in India: उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के मैदानी इलाकों में रहने वाले करोड़ों लोगों के लिए आने वाले 6 से 7 दिन किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होने वाले हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि देश के कोर हीटवेव जोन (CHZ) में 28 मई तक भीषण से अति भीषण लू (Severe Heatwave) का प्रकोप जारी रहेगा। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार का संकट सिर्फ दिन के रिकॉर्ड तोड़ते पारे तक सीमित नहीं है। अब रातें भी ठंडी नहीं हो रही हैं और हवा में बढ़ती नमी (उमस) ने मिलकर एक ऐसा चक्रव्यूह बना दिया है, जिससे बचना आम आदमी के लिए बेहद मुश्किल हो रहा है।
28 मई तक का राज्यवार अलर्ट: कहां कैसी रहेगी स्थिति?
उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश: मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वी मध्य प्रदेश में 28 मई तक 'गंभीर लू' (Severe Heatwave) की स्थिति बनी रहेगी। बुंदेलखंड का बांदा जिला पहले ही 47.6 डिग्री सेल्सियस को छू चुका है। बिहार में भी कमोबेश यही हाल है। मौसम वैज्ञानिक आनंद शंकर ने बताया कि बिहार में अभी पूरी तरह से 'फुल-ब्लोन हीटवेव' की स्थिति तो नहीं है, लेकिन दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-केंद्रीय और उत्तर-पश्चिमी जिलों में लू जैसे हालात बने हुए हैं। उच्च तापमान के साथ आ रही पूर्वी हवाओं और भारी उमस के कारण लोगों की परेशानी बढ़ी हुई है। अगले 3 दिनों तक यह स्थिति जारी रहेगी, जिसके बाद पारे में 1 से 3 डिग्री की गिरावट आ सकती है और उत्तर-पूर्वी बिहार में आंधी-बारिश से थोड़ी राहत मिल सकती है।
दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़: IMD ने बताया है कि इन राज्यों में 28 मई तक लू का प्रकोप रहेगा। हालांकि, 24 मई से 27 मई के बीच इन इलाकों में 'सीवियर हीटवेव' (अति भीषण लू) का रेड अलर्ट जारी किया गया है।
राजस्थान: पूरे राज्य में 28 मई तक भीषण गर्मी रहेगी, जबकि IMD के अनुसार पश्चिमी राजस्थान में 24 से 28 मई के दौरान पारा सारे रिकॉर्ड तोड़ सकता है।
अन्य प्रभावित राज्य: विदर्भ (महाराष्ट्र), तटीय आंध्र प्रदेश, यानम, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में भी अलग-अलग तारीखों में लू का शिकंजा कसा रहेगा।
क्यों खतरनाक साबित हो रहा है 'गर्म रातों' का यह ट्रेंड? (Warm Nights in India)
आमतौर पर सूरज ढलने के बाद मैदानी इलाकों में तापमान गिरता था और लोगों को राहत मिलती थी, लेकिन इस साल रात का न्यूनतम तापमान भी 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, अच्छी नींद और दिल की सेहत के लिए इनडोर तापमान 24 डिग्री से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
IMD के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में रात का औसत तापमान प्रति दशक 0.21 डिग्री सेल्सियस की तेजी से बढ़ रहा है। देश के 36 में से 35 राज्यों में रातें गर्म हो रही हैं, जिनमें बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक सबसे आगे हैं। रात को तापमान न गिरने के कारण इंसानी शरीर को दिन भर की तपन से उबरने का समय नहीं मिल पा रहा है, जिससे हीट स्ट्रोक और कार्डियोवैस्कुलर स्ट्रेन (दिल का दौरा) का खतरा बढ़ गया है।
तापमान के साथ उमस का 'डबल अटैक'
निजी मौसम पूर्वानुमान संस्थान स्काईमेट वेदर (Skymet Weather) के मौसम विज्ञानी महेश पलावत के अनुसार, पाकिस्तान के सिंध प्रांत और राजस्थान के रेगिस्तान से आ रही लगातार उत्तर-पश्चिमी गर्म हवाओं ने देश को भट्टी बना दिया है। इसके ऊपर से देश में औसत सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) जो 2015-19 में 67.1% थी, वह अब (2020-2024) बढ़कर 71.2% हो चुकी है।
दिल्ली, हरियाणा, यूपी और राजस्थान में उमस बहुत तेजी से बढ़ी है। तापमान भले ही 45 डिग्री सेल्सियस हो, लेकिन भारी उमस के कारण शरीर का पसीना सूख नहीं पाता, जिससे 'कंपाउंड हॉट-ह्यूमिड डेज' (गर्मी और उमस के मिले-जुले दिन) की संख्या में भारी इजाफा हुआ है।
वैज्ञानिकों का खुलासा: 2 डिग्री ज्यादा गर्म हो चुकी है हमारी आबोहवा
'ClimaMeter' के एक नए रिपोर्ट के मुताबिक, मानवीय गतिविधियों के कारण हुए जलवायु परिवर्तन ने इस साल की गर्मी को कई गुना बढ़ा दिया है। आज भारत का माहौल पिछले दशकों की तुलना में 2 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म हो चुका है। इस जानलेवा गर्मी के दायरे में इस समय देश के लगभग 4.4 करोड़ लोग और 341 बिलियन डॉलर की आर्थिक गतिविधियां सीधे तौर पर प्रभावित हो रही हैं। इसके अलावा कंक्रीट के जंगल, डामर की सड़कें और कम होते पेड़ शहरों को रात में भी ठंडा नहीं होने दे रहे हैं। पहाड़ों में कम बर्फबारी के कारण धरती सूर्य की किरणों को वापस रिफलेक्ट नहीं कर पा रही है। वहीं, मिट्टी सूखी होने के कारण 'इवेपोरेटिव कूलिंग' बंद हो गई है, जिससे सीधे हवा गर्म हो रही है।
