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यूपी की राजनीति में अखिलेश बनाम योगी, 2027 चुनाव की दिखने लगी आहट; 'टोटी चोर' से 'सियासी हिंदू' तक पहुंची बात

UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले 'टोटी' बनाम 'सनातनी' पर नया सियासी घमासान छिड़ गया है। सीएम योगी के 'टोंटी चोरी' वाले तंज पर अखिलेश यादव ने उन्हें 'करप्ट माउथ' कहा। जानिए क्या है यह पूरा विवाद और इसका राजनीतिक इतिहास।

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'टोटी' बनाम 'मठ' पर यूपी में नया घमासान

Photo : Times Now Digital

UP Politics: उत्तर प्रदेश में अगले साल यानी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों में अभी भले ही तकरीबन 8 महीने का समय बचा हो, लेकिन सूबे की सियासी तपिश अपने चरम पर पहुंच चुकी है। विकास, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे बुनियादी मुद्दों के बीच यूपी की राजनीति एक बार फिर अपने सबसे पसंदीदा और पुराने अखाड़े की ओर लौट आई है, यानी व्यक्तिगत छींटाकशी, तीखे तंज और 'टोटी' बनाम 'सनातनी' का विवाद। चुनाव से ठीक पहले उभरा यह विवाद यह साफ संकेत दे रहा है कि आगामी चुनावी जंग बेहद आक्रामक और व्यक्तिगत होने वाली है।

विवाद की शुरुआत: पर्यावरण दिवस के मंच से सीएम योगी का वो तंज

इस ताजा सियासी घमासान की स्क्रिप्ट शुक्रवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान' संगोष्ठी के दौरान लिखी गई। विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर मंच से संबोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने जल संरक्षण की बात करते-करते बिना किसी का नाम लिए एक सियासी चुटकी ले ली। योगी ने कहा, "हम हर घर नल जल योजना को आगे बढ़ा रहे हैं, कोई टोंटी चोरी कर ले रहा है। कोई टोंटी खुली छोड़ दे रहा है... जलस्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाले भूमाफिया, वन माफिया और स्मगलरों के प्रति सजग रहें। कोई पानी बर्बाद कर रहा है, तो ऐसे लोगों को टोकें।"

भले ही मुख्यमंत्री ने अपने पूरे भाषण में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों और वहां मौजूद लोगों ने इसे तुरंत सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर लगे पुराने 'टोटी चोरी' के आरोपों से जोड़कर देखना शुरू कर दिया।

क्या है यूपी का 'टोटी चोर' विवाद?

दरअसल यह विवाद करीब 9 साल पुराना है, जो साल 2017 में उत्तर प्रदेश की सत्ता बदलने के साथ शुरू हुआ था। साल 2017 में जब समाजवादी पार्टी की सरकार चुनाव हार गई और योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को लखनऊ के '5 कालिदास मार्ग' स्थित अपना सरकारी बंगला खाली करना पड़ा था। अखिलेश यादव के बंगला छोड़ते ही बीजेपी ने आरोप लगाया कि पूर्व सीएम आवास में भारी तोड़-फोड़ की गई है और वहां लगी कीमती टोटियां भी उखाड़कर साथ ले जाई गई हैं। मीडिया में बंगले की तस्वीरें दिखाई गईं और बीजेपी ने इसे सपा के खिलाफ एक बड़ा नैतिक और राजनीतिक मुद्दा बना दिया। अखिलेश यादव इन आरोपों से इतने आहत हुए थे कि उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बकायदा हाथ में टोटी लेकर बीजेपी पर अपनी छवि खराब करने का आरोप लगाया था। कुछ महीनों पहले ही उन्होंने दावा किया था कि एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और सीएम के पूर्व ओएसडी ने मिलकर यह झूठी कहानी गढ़ी थी, जिन्हें सपा सरकार आने पर खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

अखिलेश यादव का तीखा पलटवार: 'CM यानी करप्ट माउथ'

मुख्यमंत्री के 'टोटी' वाले तंज पर इस बार अखिलेश यादव ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक लंबा और बेहद व्यक्तिगत पोस्ट साझा करते हुए मुख्यमंत्री के पूरे व्यक्तित्व और उनके अतीत पर सवाल दाग दिए। अखिलेश यादव ने सीएम का मतलब 'करप्ट माउथ' बताते हुए उनके पुराने बयानों, जैसे सदन में नेता प्रतिपक्ष से व्यवहार और गुरुजनों से वाचिक व्यवहार आदि की सूची साझा की। उन्होंने लिखा कि इतने ऊंचे पद पर बैठकर ऐसा निकृष्ट बयान देना हार की हताशा को दर्शाता है, क्योंकि अब कुदरत का बुलडोजर घूम गया है।

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मठ के उत्तराधिकार और 'परिवारवाद' पर उठाए सवाल

अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पूर्व जीवन (अजय सिंह बिष्ट) का जिक्र करते हुए कुछ गंभीर और तीखे सवाल उठाए। अखिलेश ने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से लिखा कि 1994 के आसपास अजय सिंह बिष्ट अपने पारिवारिक परिवहन व्यवसाय में तीन बसें और एक ट्रक चलाते थे। उन्होंने तंज कसा कि संभवतः सीएम ने यह भाषिक अभद्रता उसी दौर में डग्गामार वाहन चलवाते समय सीखी है। अखिलेश ने दावा किया कि अजय सिंह बिष्ट के पिता और गोरखनाथ मठ के पूर्व महंत श्री अवैद्यनाथ जी रिश्ते में भाई थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चार साल में ही कोई इतना योग्य हो जाता है कि उसे मठ की गद्दी और लोकसभा की सीट मिल जाए? क्या यह योग्यता थी या रिश्तेदारी का प्रभाव? अगर ऐसा है, तो इसे 'पक्षपाती परिवारवाद' क्यों न कहा जाए?

डिंपल यादव का वार: 'ये असली सनातनी हैं या राजनीतिक हिंदू?'

इस विवाद में समाजवादी पार्टी की मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव भी दिखाई पड़ी हैं। गाजीपुर में हुए कमलेश बिंद एनकाउंटर मामले पर बीजेपी सरकार को घेरते हुए डिंपल यादव ने मुख्यमंत्री की भाषा शैली पर सीधा हमला बोला। 'टोटी' बनाम 'सनातनी' की इस बहस को आगे बढ़ाते हुए डिंपल यादव ने पलटवार किया कि मुख्यमंत्री की भाषा से ही आपको पता चल जाएगा कि सही में यह सनातनी हैं या सिर्फ राजनीतिक हिंदू बने हुए हैं। सपा का यह बयान सीधे तौर पर बीजेपी के उस कोर-वोटबैंक पर चोट करने की कोशिश है, जिसके दम पर वह चुनाव जीतती आई है।

2027 के विधानसभा चुनावों पर इसका क्या होगा असर?

यूपी की राजनीति का यह ढर्रा कोई नया नहीं है, लेकिन चुनाव से 8 महीने पहले इस तरह के व्यक्तिगत हमलों की शुरुआत होना कई राजनीतिक मायनों की ओर इशारा करता है। जब भी चुनाव नजदीक आते हैं, बुनियादी मुद्दे पीछे छूट जाते हैं और विमर्श 'टोटी', 'मठ', 'जाति' और 'धर्म' के इर्द-गिर्द सिमट जाता है। यह विवाद अब केवल दो राजनीतिक दलों की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। आगामी महीनों में बयानों का स्तर और अधिक आक्रामक होने की उम्मीद है। बीजेपी जहां 'टोटी चोरी' के बहाने सपा को भ्रष्टाचार और कुशासन के पुराने दिनों की याद दिलाना चाहती है, वहीं सपा 'राजनीतिक हिंदू' और 'परिवारवाद' का कार्ड खेलकर बीजेपी के दावों को खोखला साबित करने की कोशिश में है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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