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Neelakurinji Bloom: यहां सज गई नीले फूलों की घाटी, अभी नहीं देखी तो 2038 तक करना पड़ेगा इंतजार

Neelakurinji Bloom Kerala News: केरल के मुन्नार में 12 साल बाद नीलकुरिंजी के फूल फिर से खिले हैं। यहां कोरंडाकाडु की पहाड़ियां नीले-बैंगनी फूलों से ढक गई हैं। अभी नहीं देखा तो फिर यह नजारा 2038 में ही दिखेगा।

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केरल में 12 साल बाद खिले नीलकुरिंजी के फूल

Neelakurinji Bloom Kerala News: यह अपने आप में अनोखा अवसर है। सोचिए अगर आपने इस बार यह अवसर खो दिया तो, अगली बार आपको लगभग 12 साल बाद यानी 2038 में फिर मौका मिलेगा। जी, हम बात कर रहे हैं नीलगिरी की पहाड़ियों में खिलने वाले दुर्लभ फूल नीलकुरिंजी (Neelakurinji) की। 12 साल के लंबे इंतजार के बाद केरल में मुन्नार की पहाड़ियों में अभी यह दुर्लभ भूल खिले हैं। अगर अभी आपने यह मौका गंवा दिया तो फिर अगले मौके के लिए 12 साल का लंबा इंताजर करना होगा।

मैट्टुपेट्टी के पास कोरंडाकाडु पहाड़ियों का बड़ा हिस्सा इन दिनों बैंगनी-नीले फूलों से ढका नजर आ रहा है। प्रकृति का यह अनोखा नजारा पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए खास आकर्षण बना हुआ है। वैसे तो यह पहाड़ी इलाका हमेशा ही खूबसूरत लगता है, लेकिन नीलकुरिंजी फूलों के खिलने से जो खूबसूरती यहां दिख रही है, वह हमेशा नहीं रहेगी। नीलकुरिंजी फूल खिलने के अपने लंबे चक्र (12 साल) के लिए मशहूर है। अगर कोरंडाकाडु में खिलने वाले नीलकुरिंजी के फूल अपने सामान्य चक्र के अनुसार ही आगे भी खिलेंगे तो फूल खिलने का अगला दौर साल 2038 में देखने को मिल सकता है।

नीले-बैंगनी फूलों की चादर से सजी पहाड़ियां

केरल के इडुक्की जिले में स्थित मुन्नार अपनी हरी-भरी पहाड़ियों और चाय बागानों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। अब मैट्टुपेट्टी के पास कोरंडाकाडु की पहाड़ियों में नीलकुरिंजी के बड़े पैमाने पर खिलने से यहां का प्राकृतिक दृश्य पूरी तरह बदल गया है।

दूर तक फैली पहाड़ियों पर एक साथ खिले बैंगनी और नीले फूल पहले से ही खूबसूरत इस पहाड़ी इलाके को और भी खूबसूरत बना रहे हैं। नीलकुरिंजी का इतनी बड़ी संख्या से खिलना पश्चिमी घाट की सबसे खास प्राकृतिक घटनाओं में गिना जाता है।

क्या है नीलकुरिंजी?

खूबसूरत नीलकुरिंजी का वैज्ञानिक नाम Strobilanthes kunthiana है। यह पश्चिमी घाट के ऊंचाई वाले घास के मैदानों और शोला पारिस्थितिकी तंत्र में पाया जाने वाला एक झाड़ीदार पौधा है। यह पौंधा केरल में मुन्नार और आसपास की पहाड़ियों में बड़ी मात्रा में होता है। इस पौधे की सबसे खास विशेषता फूलों का सामूहिक रूप से खिलना यानी Gregarious Flowering है।

कई वर्षों तक सामान्य रूप से दिखाई न देने वाले पौधे अपने जैविक चक्र के पूरा होने के बाद लगभग एक साथ फूलों से भर जाते हैं। यही कारण है कि जब नीलकुरिंजी खिलता है तो पहाड़ी ढलानों का बड़ा हिस्सा कुछ समय के लिए नीले-बैंगनी रंग में बदल जाता है।

पर्यटन से ज्यादा संरक्षण की जरूरत

नीलकुरिंजी फूल खिलना सिर्फ पर्यटकों के लिए आकर्षण नहीं है। यह पश्चिमी घाट के संवेदनशील पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र से भी जुड़ा हुआ है। जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आवास का नुकसान, बढ़ता पर्यटन और मानवीय गतिविधियां इन इलाकों पर दबाव बढ़ा रही हैं। ऐसे में नीलकुरिंजी का खिलना प्राकृतिक विरासत और उसके संरक्षण की जरूरत की ओर भी ध्यान खींचता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे संवेदनशील इलाकों में पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

फिलहाल मुन्नार की कोरंडाकाडु पहाड़ियां प्रकृति के इस दुर्लभ चक्र का हिस्सा बनी हुई हैं। फूलों का यह मौसम खत्म होने के बाद पहाड़ियां फिर अपने सामान्य रूप में लौट जाएंगी और अगली बार इतनी बड़ी संख्या में नीलकुरिंजी के फूलों के खिलने के लिए प्रकृति को भी एक और लंबा चक्र पूरा करना होगा।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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