UP Panchayat Polls: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में अहम सुनवाई है। चुनाव में देरी को लेकर दाखिल याचिकाओं पर कोर्ट में सुनवाई चल रही है। पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव होने हैं। चुनाव में देरी और पंचायतों के कार्यकाल से जुड़े सवाल अदालत के सामने हैं। सबसे अहम मुद्दों में OBC आरक्षण की प्रक्रिया शामिल है। राज्य निर्वाचन आयोग पहले अदालत को बता चुका है कि मतदाता सूची तैयार है।
पंचायत चुनाव में देरी से जुड़े दशरथ यादव बनाम उत्तर प्रदेश सरकार, रिट-सी संख्या 22590/2026 मामले में 22 सितंबर की सुनवाई के बाद अगली तारीख 7 अक्टूबर तय की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं करने के निर्देश दिए हैं। आज की सुनवाई में सरकार और निर्वाचन आयोग की ओर से रखी जाने वाली जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
मामला क्या है?
उत्तर प्रदेश में पिछला पंचायत चुनाव 2021 में हुआ था। ग्राम प्रधानों, BDC (क्षेत्र पंचायत सदस्य) और जिला पंचायत सदस्यों का 5 साल का संवैधानिक कार्यकाल मई 2026 में ही पूरा हो चुका है। समय सीमा के भीतर चुनाव न कराने और पूर्व प्रधानों/अधिकारियों को प्रशासक बनाकर काम चलाने के सरकारी रवैये के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गईं। याचिकाओं में मांग की गई है कि आयोग जल्द से जल्द चुनाव की समयसीमा तय करे। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा है कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत तय समयसीमा के भीतर चुनाव क्यों नहीं कराए जा रहे हैं?
चुनाव की समयसीमा
राज्य सरकार और प्रशासनिक अमले की हाउस लिस्टिंग व जनगणना (Census) कार्यों में व्यस्तता की वजह से भी प्रशासनिक तैयारियों में देरी की बात कही गई। अदालत का रुख स्पष्ट है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के बिना पंचायतों में अनिश्चितकाल के लिए प्रशासक नियुक्त नहीं रखे जा सकते और सरकार को एक निश्चित समयसीमा देनी होगी।
राज्य निर्वाचन आयोग की स्थिति
राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने अदालत में स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची तैयार है और उसका अंतिम प्रकाशन हो चुका है। आयोग ने रुख रखा है कि जैसे ही सरकार आरक्षण की सूची फाइनल करके सौंपेगी और सुरक्षा/कर्मचारी व्यवस्था मुहैया कराएगी, आयोग तुरंत चुनाव कार्यक्रम की अधिसूचना जारी करने के लिए तैयार है।
