सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को ध्वस्त किए जाने का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। मस्जिद को गिराने के आदेश को चुनौती देते हुए बुधवार को हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की गई है। याचिका में सहारनपुर के नगर मजिस्ट्रेट के 16 जुलाई 2026 के विध्वंस आदेश और जिला न्यायाधीश के दो सितंबर 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें मस्जिद को ध्वस्त करने के आदेश को बरकरार रखा गया था।
ये याचिका अधिवक्ता मोहम्मद तनवीर अहमद की ओर से संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत दायर की गई है। याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार को सहारनपुर के जिलाधिकारी के माध्यम से पक्षकार बनाया गया है। इसके अलावा मस्जिद के मौलवी और प्रबंधक अब्दुल हामिद को भी पक्षकार बनाया गया है।
अधिकारियों के आदेश पर उठाए सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया है कि नगर मजिस्ट्रेट और जिला न्यायाधीश ने अपने अधिकार क्षेत्र और वैधानिक अधिकार से बाहर जाकर मस्जिद को ध्वस्त करने का आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने दोनों आदेशों को रद्द करने की मांग की है। मामले के मुताबिक, सहारनपुर के नगर मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई को उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परिसर (बेदखली और अनधिकृत कब्जेदार) अधिनियम, 1972 के तहत आदेश जारी किया था। इसमें कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित करीब 315 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाली मस्जिद को ध्वस्त करने का निर्देश दिया गया था। इसके साथ ही मस्जिद के प्रबंधन पर करीब 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।जिला अदालत में भी खारिज हुई थी अपील
नगर मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ जिला न्यायालय में अपील दाखिल की गई थी। हालांकि, जिला न्यायाधीश ने 2 सितंबर 2026 को अपील खारिज करते हुए विध्वंस के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद प्रशासन की ओर से 5 सितंबर को मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया। अब इस कार्रवाई और इससे जुड़े दोनों न्यायिक आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।अब हाईकोर्ट में होगी मामले की सुनवाई
याचिका दाखिल होने के बाद मामले में हाईकोर्ट के रुख पर निगाह है। याचिकाकर्ता ने विध्वंस की कार्रवाई और उससे पहले पारित आदेशों की वैधता पर सवाल उठाते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है।
