ओडिशा के बालासोर जिले से एक बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहां जंगल के एक इलाके में पांच ओरंगउटान लावारिस हालत में मिले हैं। इन सभी को सुरक्षित रेस्क्यू कर भुवनेश्वर के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया गया है, जहां इन्हें क्वारंटीन में रखकर स्वास्थ्य जांच की जा रही है। स्थानीय प्रशान का कहना है कि इनका नेटिव न तो ओडिशा है और न ही भारत। तो फिर ये कहां से आए हैं, इसकी जांच की जाएगी।
बालासोर जिले के उदयपुर-तालसारी इलाके में एक कैसुआरिना प्लांटेशन के पास पांच ओरंगउटान पाए गए। स्थानीय लोगों की सूचना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सभी जानवरों को सुरक्षित रेस्क्यू किया। इसके बाद पांचों ओरंगउटान को भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क लाया गया। यहां पहुंचने के बाद इनकी स्वास्थ्य जांच की गई और उन्हें साफ किया गया। फिलहाल सभी को सीसीटीवी निगरानी वाले क्वारंटीन सेंटर में रखा गया है। जू प्रशासन के मुताबिक, ओरंगउटान को नियमित रूप से भोजन दिया जा रहा है। इनमें से कुछ ओरंगउटान हाथ से केले भी खा रहे हैं। बताया जा रहा है कि पांचों में से दो ऑरंगुटान काफी छोटे हैं।
रेस्क्यू किए गए एक ओरंगउटान को नंदनकानन पहुंचने पर बुखार था। उसे दवा दी गई, जिसके बाद उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। पशु चिकित्सक सभी की लगातार निगरानी कर रहे हैं और किसी भी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या की जांच की जा रही है। खास बात यह है कि ओरंगउटान भारत के मूल निवासी नहीं हैं। ये आमतौर पर दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगलों में पाए जाते हैं। ऐसे में ओडिशा के तटीय इलाके में इस जीव का मिलना कई सवाल खड़े करता है।
वन विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि ये जानवर कहां से आए? इन्हें बालासोर तक कैसे लाया गया और जंगल में किसने इन्हें छोड़ दिया। हालांकि, अभी तक इनके वास्तविक स्रोत और यहां पहुंचने की परिस्थितियों का पता नहीं चल पाया है। फिलहाल पांचों ओरंगउटान नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में विशेषज्ञों की निगरानी में हैं। वन विभाग की जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि ये दुर्लभ जानवर ओडिशा के जंगल तक कैसे पहुंचे।
भारत में नहीं मिलते ओरंगउटान
कहा जाता है कि ओरंगुटान एशिया के जंगलों में पाया जाने वाला एक बेहद समझदार वनमानुष (कपि) है। यह उष्णकटिबंधीय (tropical) वर्षावनों के घने जंगलों में रहते हैं। इनके लंबे पैर विपरीत दिशा में मुड़ने वाली उंगलियां और अंगूठे और घूमने वाले कूल्हे इन्हें पेड़ों पर आसानी से चलने में सक्षम बनाते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ये पांचों ओरंगुटान बालासोर पहुंचे कैसे? ओरंगुटान भारत के जंगलों में नहीं पाए जाते। इनका प्राकृतिक आवास दक्षिण-पूर्व एशिया के बोर्नियो और सुमात्रा द्वीपों के घने जंगल हैं, जो बालासोर से करीब 4,000 किलोमीटर दूर हैं। ऐसे में यह लगभग तय माना जा रहा है कि ये ओरंगुटान खुद चलकर यहां नहीं पहुंचे होंगे। अब वन विभाग की जांच का मुख्य सवाल यही है कि इन्हें बालासोर तक कौन और किस तरह लेकर आया।
