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Video : 'घोड़ा' बना बुजुर्ग! पीठ पर सवार होकर पटवारी ने पार किया नाला; वीडियो वायरल होने पर सस्पेंड

मध्य प्रदेश के सीधी के ग्राम माटा में बुजुर्ग की पीठ पर सवार होकर पानी भरा रास्ता पार करने वाले पटवारी नीलेश नामदेव का वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

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सीधी जिले में पीठ पर सवार हुआ पटवारी

सीधी : जिले के ग्राम माटा में एक पटवारी का बुजुर्ग ग्रामीण की पीठ पर सवार होकर पानी से भरे गड्ढे को पार करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। मामले को गंभीरता से लेते हुए पटवारी नीलेश नामदेव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

वायरल वीडियो में एक व्यक्ति पानी से भरे रास्ते को पार करने के लिए बुजुर्ग ग्रामीण ललबा केवट की पीठ पर बैठा नजर आ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, पीठ पर सवार व्यक्ति माटा हल्का क्षेत्र का पटवारी नीलेश नामदेव है। वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी देखी गई और पटवारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठी।

पटवारी नीलेश नामदेव को तत्काल प्रभाव से निलंबित

मामले की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी। कलेक्टर विकास मिश्रा के निर्देश पर अपर कलेक्टर बीपी पाण्डेय ग्राम माटा पहुंचे और पूरे प्रकरण की जांच की। जांच के बाद कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम गोपद बनास प्रिया पाठक ने पटवारी नीलेश नामदेव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

ग्रामीणों का कहना है कि किसी बुजुर्ग व्यक्ति की पीठ पर बैठकर नाला पार करना उसकी गरिमा के खिलाफ है। वीडियो वायरल होने के बाद इस घटना को लेकर क्षेत्र में काफी आक्रोश देखने को मिला। प्रशासन की ओर से मामले की जांच के बाद पटवारी पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। एसडीएम प्रिया पाठक ने बताया कि प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पटवारी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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