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यूपी में ऐतिहासिक धरोहरों की हालत खराब, इलाहाबाद HC ने सरकार और ASI को घेरा; 8 हफ्तों में मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में धरोहर स्थलों की जर्जर हालत पर संज्ञान लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार के कई विभागों को नोटिस जारी किया है। याचिका में हजारों ऐतिहासिक स्थलों के असुरक्षित होने का दावा किया गया है। कोर्ट ने 8 सप्ताह में जवाब मांगा है और संरक्षण में लापरवाही पर गंभीर चिंता भी जताई है।

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इलाहाबाद हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

Photo : iStock

Prayagraj News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश में झांसी, वृंदावन, आगरा और लखनऊ जैसे विभिन्न स्थानों पर धरोहर स्थलों की जर्जर हालत पर संज्ञान में लिया है। अदालत ने संस्कृति मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण, पर्यटन मंत्रालय, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार और प्रदेश के पुरातत्व विभाग को नोटिस जारी किया है।

अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने 23 मार्च के अपने आदेश में यूपी में संबंधित विभागों और केंद्र सरकार के मंत्रालयों को आठ सप्ताह में जवाब दाखिल करने का भी निर्देश दिया। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कई अमूल्य धरोहर स्थल और ढांचे संबंधित अधिकारियों की उपेक्षा की वजह से खंडहर और जर्जर ढांचों में बदल रहे हैं।

आगरा से झांसी तक खस्ताहाल स्मारक

याचिका में कहा गया कि पूरे राज्य में करीब 3500 पुरातत्व धरोहर स्मारक और प्राचीन स्थल मौजूद हैं जो पूरी तरह से असुरक्षित हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, इनमें से केवल 212 स्थल राज्य के पुरातत्व विभाग द्वारा कथित तौर पर संरक्षित हैं। इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इनटैक) के मुताबिक, पूरे राज्य में 5,416 धरोहर/ऐतिहासिक भवन हैं। हालांकि, इनमें से केवल 412 धरोहर स्थलों का संरक्षण किया जा रहा है जिसमें राज्य के पुरातत्व विभाग द्वारा 212, एएसआई, आगरा द्वारा 154 और एएसआई लखनऊ द्वारा 55 का संरक्षण किया जा रहा है।

संरक्षण के अभाव में खत्म होती विरासत

याचिकाकर्ता ने कहा कि शेष 4,995 प्राचीन ढांचे जर्जर स्थिति में हैं और अस्तित्व खोने के कगार पर हैं। इनटैक द्वारा सूचीबद्ध इन सभी धरोहर ढांचों को संबंधित विभागों द्वारा संरक्षित किए जाने की जरूरत है। प्राचीन स्मारक अधिनियम के तहत केंद्र और राज्य सरकार की इन ढांचों को संरक्षित करने की जिम्मेदारी है। याचिका में कहा गया कि आगरा क्षेत्र में आने वाले कुछ अति महत्वपूर्ण धरोहर ढांचों के लिए आज तक आवश्यक विरासत उपनियम नहीं हैं, जबकि प्राचीन स्मारक अधिनियम के तहत ये उप नियम होने आवश्यक हैं।

(इनपुट - भाषा)

Pooja Kumari
पूजा कुमारीauthor

पूजा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा कर चुकी पूजा को टीवी मीडिया में भी काम करने का अनुभव है। शहरी मुद्दों की गहरी समझ के कारण पूजा लोकल न्यूज, मेट्रो व रेल अपडेट्स, रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर, लोकल डेवलपमेंट, मौसम, क्राइम, स्थानीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। शहरों की नब्ज पहचानने और स्थानीय संवेदनशीलताओं को खबरों में प्रभावी ढंग से पिरोने की क्षमता उनकी राइटिंग स्किल को विशेष बनाती है। पूजा अब तक 3,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट्स लिख चुकी हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण लोकल अपडेट्स, विश्लेषणात्मक स्टोरीज और रिपोर्ताज शामिल हैं।

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