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UP के महाराजगंज से दो चीनी नागरिक गिरफ्तार, अवैध रूप से भारत में घुसने का आरोप

UP News: उत्तर प्रदेश के महाराजगंज से दो चीनी नागरिक गिरफ्तार हुए हैं, जिन पर अवैध रूप से भारत में घुसने का आरोप है। जानकारी के मुताबिक दोनों की शिनाख्त हो चुकी है, एक 37 वर्षी यांग मेंग मेंग और दूसरा 35 साल का गु बाओकियांग है। पुलिस आगे की कार्रवाई में जुट गई है।

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भारत में घुसपैठ करने वाले दो चीनी गिरफ्तार।

Photo : iStock

Two Chinese Arrested: भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में दो चीनी नागरिकों को अवैध रूप से भारत में घुसने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बृहस्पतिवार को बताया कि इस काम में उनकी मदद कर रहे एक भूटानी शरणार्थी को भी गिरफ्तार किया गया है। तीनों को सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने दोनों देशों के बीच सोनौली ट्रांजिट प्वाइंट पर पकड़ा।

दोनों के पास से मिला चीनी पासपोर्ट

महाराजगंज के अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह ने कहा, 'पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के यांग मेंग मेंग (37) और गु बाओकियांग (35) दोनों बुधवार रात सोनौली भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में घूम रहे थे, जब उन्हें सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने नियमित जांच के लिए रोका। वे नेपाल के काठमांडू से भारत आ रहे थे। सोनौली क्षेत्र में आव्रजन विभाग ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया, जब उनके पास से चीनी पासपोर्ट मिला, लेकिन भारतीय वीजा के कागजात और कोई वैध दस्तावेज नहीं मिले।'

भारत में प्रवेश कराने वाला गिरफ्तार

पुलिस अधिकारी ने बताया कि तिब्बती शरणार्थी लोबसांग जामयांग (44) को भी हिरासत में लिया गया है, जिसने दोनों चीनी नागरिकों को नेपाल से अवैध रूप से भारत में प्रवेश कराने की जिम्मेदारी ली थी। अपर पुलिस अधीक्षक सिंह ने बताया कि तिब्बती शरणार्थी ने दोनों चीनी नागरिकों के फर्जी भारतीय आधार कार्ड भी बनवाए थे और काठमांडू से गोरखपुर तक उनके परिवहन की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन वे सुरक्षा एजेंसियों से बच नहीं सके और तीनों को नेपाल से भारत में प्रवेश करते समय एसएसबी जवानों ने गिरफ्तार कर लिया।

दोनों चीनी नागरिकों से हो रही पूछताछ

उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए दोनों चीनी नागरिकों से जब वैध दस्तावेज मांगे गए तो उनके पास से कोई वीजा नहीं मिला, जबकि तिब्बती शरणार्थी के पास भारतीय आधार कार्ड और पैन कार्ड मिला, जिस पर भारतीय पता लिखा था। अधिकारी ने बताया कि उनके इस कदम के पीछे का मकसद अभी पता नहीं चल सका है। उनसे पूछताछ की जा रही है।

पुलिस ने दोनों चीनी नागरिकों के खिलाफ विदेशी अधिनियम की धारा 14 समेत कानून की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जबकि स्थानीय सोनौली थाने में संबंधित कानून के तहत मामला दर्ज कर तिब्बती व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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