IndiGo Flight Medical Emergency: दिल्ली से आइजोल आ रही इंडिगो की उड़ान में मिजोरम के तीन डॉक्टरों ने गंभीर रूप से बीमार एक महिला यात्री की जान बचाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया। यह घटना 3 अक्टूबर की है। 32 वर्षीय महिला गुर्दे की पुरानी बीमारी से पीड़ित थी और इलाज के लिए दिल्ली जाने के बाद मिजोरम लौट रही थी। वह नियमित डायलिसिस करा रही थी। उड़ान के दौरान महिला को अचानक सांस लेने में परेशानी हुई। चालक दल ने विमान में किसी चिकित्सक की मदद के लिए घोषणा की, जिसके बाद गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. बेंजामिन खियांग्ते, बाल रोग विशेषज्ञ एवं क्रिटिकल केयर सुपर-स्पेशलिस्ट डॉ. एफ रेमथांगपुई उर्फ अरेमी और जनरल सर्जन डॉ. विली लालहरुइतलुआंगा मदद के लिए आगे आए।
भाजपा प्रभारी भागवत किशनराव कराड भी थे विमान में
पूर्व केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री और मिजोरम के लिए नवनियुक्त भाजपा प्रभारी भागवत किशनराव कराड भी विमान में थे और उन्होंने शुरुआत में महिला की मदद की थी। डॉ. खियांग्ते ने पीटीआई भाषा को बताया कि विमान के आइजोल पहुंचने से करीब एक घंटे पहले महिला की हालत अचानक बिगड़ गई। उसकी सांस लेने में दिक्कत बढ़ गई और ऑक्सीजन स्तर काफी कम हो गया। डॉक्टरों ने जांच में महिला की ऑक्सीजन संतृप्ति करीब 40 प्रतिशत पाई। उन्होंने इनहेलर और ऑक्सीजन दी, लेकिन विमान में सीमित क्षमता के कारण करीब चार लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट ही दी जा सकती थी। स्टेरॉयड देने के बाद ऑक्सीजन स्तर कुछ समय के लिए 70-80 प्रतिशत तक पहुंचा।
महिला का ऑक्सीजन स्तर फिर गिरने लगा
पायलट ने विमान को कोलकाता की ओर मोड़ने का विकल्प दिया था, लेकिन स्थिति में अस्थायी सुधार के बाद डॉक्टरों ने आइजोल की उड़ान जारी रखने का फैसला किया। हालांकि, कुछ समय बाद महिला का ऑक्सीजन स्तर फिर गिरने लगा और डॉक्टरों ने आपातकालीन व्यवस्था ’इंट्यूबेशन’ पर विचार किया। इंट्यूबेशन एक चिकित्सकीय प्रक्रिया है, जिसमें डॉक्टर या अन्य प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी मुंह या नाक के रास्ते एक लचीली ट्यूब श्वासनली में डालते हैं। इसका उद्देश्य वायुमार्ग को खुला रखना और मरीज को सांस लेने में मदद करना होता है। विमान में इसके लिए जरूरी उपकरण नहीं थे। डॉक्टरों ने चालक दल से लेंगपुई हवाईअड्डे पर एम्बुलेंस और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था करने को कहा।
महिला का स्ट्रेचर पर ही ’इंट्यूबेशन’ किया गया
विमान के उतरने के बाद हवाईअड्डे की एम्बुलेंस में ऑक्सीजन तो उपलब्ध थी, लेकिन उन्नत श्वसन सहायता के लिए जरूरी उपकरण नहीं थे। इसके बाद डॉक्टर महिला को सीधे लेंगपुई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां जरूरी आपात उपकरण उपलब्ध थे। वहां महिला का स्ट्रेचर पर ही ’इंट्यूबेशन’ किया गया। इसके बाद उसकी ऑक्सीजन संतृप्ति में सुधार हुआ और अस्पताल में बेहतर ऑक्सीजन आपूर्ति मिलने से उसकी हालत धीरे-धीरे स्थिर होने लगी। इसके बाद डॉक्टरों ने आइजोल में गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में बेड की व्यवस्था के लिए अस्पतालों से संपर्क किया और अंततः एलआरएम अस्पताल में बेड मिला। डॉ. विली और डॉ. रेमथांगपुई एम्बुलेंस में महिला के साथ आइजोल गए। महिला को वेंटिलेटर पर रखा गया और बाद में डायलिसिस किया गया। डॉ. खियांग्ते ने बताया कि रात तक उसकी हालत में सुधार हो गया और वह बातचीत करने लगी। उन्होंने कहा कि समय पर मिली चिकित्सा सहायता बेहद महत्वपूर्ण रही। उन्होंने कहा, "अगर उसे समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलती तो स्थिति बहुत गंभीर हो सकती थी। मुझे सच में उम्मीद नहीं थी कि वह बच पाएगी।"
महिला के फेफड़ों में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो गया था
डॉ. खियांग्ते के अनुसार, महिला के फेफड़ों में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो गया था, जिससे सांस लेने में परेशानी और बढ़ सकती थी। उन्होंने कहा कि तीनों डॉक्टरों ने केवल संकट में फंसे एक सहयात्री की मदद के लिए आगे बढ़कर अपना कर्तव्य निभाया। उन्होंने कहा, "हम खुश हैं कि हम किसी जरूरतमंद की मदद करने की स्थिति में थे। हमने वही किया जो हम कर सकते थे और जो हमें करना चाहिए था।" डॉ. खियांग्ते आइजोल के मिशन वेंग में अपना गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं लिवर केंद्र चलाते हैं। डॉ. रेमथांगपुई आइजोल सिविल अस्पताल में कार्यरत हैं और वह राज्य की एकमात्र क्रिटिकल केयर सुपर-स्पेशलिस्ट हैं। डॉ. विली पहले जोरम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल और एलआरएम अस्पताल में काम कर चुके हैं और फिलहाल देहरादून में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी में पोस्ट-डॉक्टोरल सुपर-स्पेशियलिटी डिग्री (एमसीएच) के लिए प्रयास कर रहे हैं।
