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Fog in Delhi NCR: दिल्ली-NCR में चारों तरफ छाया घना कोहरा, विजिबिलिटी कम होने से थमे वाहनों के पहिए

दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में घना कोहरा छाया हुआ है। विजिबिलिटी बेहद कम होने से सड़कों पर वाहनों की रफ्तार कम हो गई है।

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दिल्ली समेत कई राज्यों में कोहरा

Photo : Twitter

दिल्ली: राजधानी दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में गुरुवार-शुक्रवार की रात से कोहरा देखने को मिल रहा है। विजिबिलिटी 200 से 500 मीटर तक ही है। दिल्ली के पालम में 400 मी विजिबिलिटी दर्ज की जा रही है। पहाड़ों में लगातार बर्फबारी से तापमान में और गिरावट आ गई है। शुक्रवार की सुबह राष्ट्रीय राजधानी में कोहरे की परत छा गई है। पंडित पंत मार्,बाबा खड़क सिंह मार्ग और अक्षरधाम क्षेत्र में सड़कों पर कुछ दिखाई नहीं दे रहा है।

वहीं, पंजाब में कोहरे की चादर ने लोगों को परेशान कर रखा है। सुबह अमृतसर में विजिबिलिटी 50 रही। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के कई जिलों में कोहरे और ठंड के कारण लोग घरों से नहीं निकल रहे हैं। कानपुर, लखनऊ, बरेली, सुलतानपुर, वाराणसी और प्रयागराज में हालात काफी खराब हैं। इसके अलावा बिहार के कई जिलों में कड़ाके की ठंड के साथ कोहरे ने दस्तक दे दी है। तो त्रिपुरा ने भी कोहरे की चादर ओढ़ ली है। एक्सप्रेस-वे और हाईवे में वाहन की संख्या काफी कम नजर आ रही है। जो वाहन चल भी रहे हैं वो सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे हैं। मौसम विभाग ने ठंड और कोहरे के लगातार जारी रहने के संकेत दिए हैं।

दिल्ली-एनसीआर में बारिश के आसार

मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में शुक्रवार रात हल्की बारिश के आसार हैं। इससे न्यूनतम व अधिकतम तापमान में बढ़ सकता है। गुरुवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 23 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं, न्यूनतम तापमान 6.4 डिग्री रहा जो सामान्य से दो डिग्री कम है। ऐसे में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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