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पुलिस स्टेशनों में CCTV को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र की नई योजना पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने आज पुलिस स्टेशनों में CCTV कैमरों की व्यवस्था को लेकर केंद्र और राज्यों से सवाल किए। झारखंड में साल 2020 से एक भी नया कैमरा नहीं लगाए जाने की जानकारी पर भी कोर्ट ने सख्ती दिखाई।

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पुलिस स्टेशनों में CCTV कैमरों पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों से जवाब मांगा

देशभर के पुलिस स्टेशनों में CCTV कैमरों की व्यवस्था और उनके रखरखाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा है। आज यानी गुरुवार 3 सितंबर को हुई सुनवाई में अदालत ने पुलिस आधुनिकीकरण के लिए केंद्र की प्रस्तावित नई योजना में CCTV के लिए फंडिंग और मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करने को लेकर सवाल उठाए। इसी दौरान झारखंड में पुलिस स्टेशनों पर CCTV की स्थिति को लेकर अदालत के सामने चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। बताया गया कि राज्य में 2020 के बाद से एक भी नया CCTV कैमरा नहीं लगाया गया है।

सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार ने 31 अगस्त 2026 को अपना हलफनामा दाखिल किया है। इसमें पुलिस आधुनिकीकरण के लिए अगले पांच वर्षों में करीब 24 हजार करोड़ रुपये खर्च करने के प्रस्ताव वाली नई योजना की जानकारी दी गई है।

नई योजना में CCTV को अहम हिस्सा बताया

केंद्र के प्रस्ताव के मुताबिक, पुलिस मॉर्डनाइजेशन मिशन के जरिए पुलिस और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने पर जोर दिया जाएगा। इसमें तकनीक, लक्षित निवेश और सुधारों के जरिए पुलिस व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की बात कही गई है।

सिद्धार्थ दवे ने बताया कि प्रस्तावित योजना में पुलिस स्टेशनों के CCTV कैमरों के लिए पर्याप्त प्रावधान किया जाएगा और इसे पुलिस आधुनिकीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। मौजूदा पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत असम की योजना को 31 मार्च 2027 तक बढ़ाए जाने की जानकारी भी अदालत को दी गई।

SC ने पूछा- मौजूदा फंड का इस्तेमाल क्यों नहीं?

सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने अदालत को बताया कि मौजूदा योजना खत्म होने के करीब है। ऐसे में पहले से उपलब्ध धनराशि के लैप्स होने से बचाने और CCTV इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए फंडिंग जारी रखने की जरूरत है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सवाल किया कि मौजूदा योजना में बचे फंड को नई योजना में ट्रांसफर करने का प्रावधान उसके हलफनामे में कहां है। अदालत ने यह भी पूछा कि नई योजना आने का इंतजार करने के बजाय मौजूदा फंड से पुलिस स्टेशनों में CCTV व्यवस्था को तत्काल मजबूत क्यों नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने साफ किया कि नई योजना लागू होने तक मौजूदा CCTV व्यवस्था में फंड की कमी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने केंद्र का हलफनामा रिकॉर्ड पर लिया और ASG राजा ठाकरे को इस मुद्दे पर केंद्र से आवश्यक निर्देश लेने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।

झारखंड में 2020 से CCTV को लेकर सवाल

सुनवाई के अगले चरण में झारखंड में पुलिस स्टेशनों पर CCTV की स्थिति का मुद्दा उठा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि झारखंड ने अदालत की ओर से मांगी गई विशेष जानकारी अभी तक उपलब्ध नहीं कराई है। कोर्ट ने राज्य से स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

इसी दौरान सिद्धार्थ दवे ने झारखंड की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि 2020 से एक भी CCTV कैमरा नहीं लगाया गया है। इस जानकारी के सामने आने के बाद राज्य में पुलिस स्टेशनों की निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। मामले पर अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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