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दिल्ली: परिवार से अपने संघर्ष छिपाए, झूठ बोलते रहे, सोते थे फुटपाथ पर...करंट से जान गंवाने वाले 2 किशोरों की कहानी रुला देगी

भरत और अरविंद बेहतर जीवन की तलाश में बिहार के मधुबनी से दिल्ली आए थे। दोनों किशोरों के परिवार वालों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि वे किन परिस्थितियों में रह रहे थे।

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दिल्ली में पेड़ गिरने के बाद करंट लगने से दो किशोरों की मौत की दर्दनाक कहानी

Photo : PTI

Two Teens Electrocuted in Delhi: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के आरके पुरम इलाके में करंट लगने से जान गंवाने वाले दो किशोरों ने अपने परिवार का भरण पोषण करने की खातिर अपने संघर्ष छुपाए। घरवालों को दुख न पहुंचे इसलिए झूठ बोलते रहे और कड़ी मेहनत करते रहे। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। इसमें से एक किशोर भरत के भाई ने बताया कि उनका भाई परिवार की मदद करने के लिए अपनी पूरी कमाई मां की दवाओं पर खर्च कर देता था और खुद के लिए जेब खर्च के तौर पर बहुत कम रकम रखता था। रविवार तड़के तेज बारिश और आंधी के कारण बिजली की तारें टूटकर गिर गए, जिससे फुटपाथ पर सो रहे भरत (16) और अरविंद (17) की करंट लगने से मौत हो गई थी। दोनों सड़क किनारे स्थित एक भोजनालय में काम करते थे।

बेहतर जीवन की तलाश में मधुबनी से दिल्ली आए थे

दोनों बेहतर जीवन की तलाश में बिहार के मधुबनी से दिल्ली आए थे। दोनों किशोरों के परिवार वालों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि वे किन परिस्थितियों में रह रहे थे। भरत और अरविंद के परिवारों को लगता था कि वे किसी होटल में काम कर रहे हैं और उनके रहने के लिए उचित व्यवस्था उपलब्ध है। भरत के भाई राम ने बताया कि उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनका भाई इतनी कठिनाइयों का सामना कर रहा है और सड़क किनारे सो रहा है।

होटल में नहीं सड़क किनारे भोजनालय में काम करता था भरत

राम ने कहा, उसने हमें बताया था कि वह एक होटल में काम करता है और उसके पास सभी सुविधाएं हैं। लेकिन अब हमें पता चला है कि वह सड़क किनारे स्थित एक भोजनालय पर काम कर रहा था। उन्होंने बताया कि भरत दो साल पहले बेगूसराय से दिल्ली आया था और 7,000 रुपये प्रति माह कमा रहा था। उन्होंने कहा, मेरा भाई जेब खर्च के तौर पर बहुत कम रकम रखता था। वह अपनी कमाई का अधिकांश हिस्सा हमारी मां लक्ष्मी के लिए दवाइयां खरीदने में खर्च कर देता था, जो दिल्ली में नौकरानी के रूप में काम करती हैं।

अपनी परेशानियों के बारे में झूठ बोलता रहा

राम ने कहा, हमें अभी भी समझ में नहीं आ रहा है कि वह अपनी परेशानियों के बारे में झूठ क्यों बोलता रहा। वह सिर्फ परिवार की आर्थिक मदद करना चाहता था। हम दिल्ली में ही उसका अंतिम संस्कार करने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि दिल्ली सरकार परिवार को आर्थिक मदद मुहैया कराएगी।

अरविंद ने कहा था, जल्द पैसे भेजूंगा

दूसरे किशोर अरविंद के चचेरे भाई प्रेम कुमार ने बताया कि अरविंद बहुत कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारी उठाने दिल्ली आ गया था। प्रेम ने बताया, उसने ने भी हमें यही बताया था कि वह होटल में काम करता है और वहीं रहता है। हमें लगा कि उसने अन्य कर्मचारियों के साथ वहां एक कमरा ले रखा है। उसी दिन (हादसे वाले दिन) मेरी उससे बात हुई थी। कह रहा था कि वह ठीक है और जल्द पैसे भेजेगा। (पीटीआई-भाषा इनपुट)

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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