क्या आपको पता है कि मैराथन में दौड़ने वाले धावकों की औसत स्पीड कितनी होती है? नहीं पता तो हम बता दें कि उनकी औसत स्पीड 20 किमी के करीब होती है। लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि कोई ट्रेन इतनी कम स्पीड से चले? इतना ही नहीं, हमारे देश में तो एक ऐसी ट्रेन भी चलती है, जो इसके आधी स्पीड यानी लगभग 9 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है। फिर भी इसके यात्रियों को कोई शिकायत नहीं होती, बल्कि वह इस ट्रेन के सुहाने सफर का आनंद लेते हैं। चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं -
सबसे सुस्त ट्रेन का नाम क्या है?
देश की सबसे सुस्त ट्रेन का नाम मेट्टुपलयम-ऊटी पैसेंजर ट्रेन (Mettupalayam-Ooty passenger train) है।
सबसे सुस्त ट्रेन का रूट कितना लंबा
देश की सबसे सुस्त ट्रेन का रूट करीब 45 किमी का है और इस दूरी को तय करने में यह ट्रेन करीब 5 घंटे का समय लेती है। यानी ट्रेन की रफ्तार करीब 9 किमी प्रति घंटे की रहती है।
इस सुस्त और सुहानी यात्रा की शुरुआत कहां से होती है?
इस सुस्त चाल सुहानी यात्रा की शुरुआत नीलगिरी की तलहटी में मेट्टुपलयम स्टेशन से होती है। इस सुहाने सफर की मंजिल तमिलनाडु का खूबसूरत हिल स्टेशन ऊटी है। ट्रेन ऊटी स्टेशन तक पहुंचने में करीब 9 घंटे का समय लेती है। इस ट्रेन के ज्यादातर कोच लकड़ी के बने हैं और उन्हें नीले व क्रीम रंग से रंगा गया है।

250 ब्रिज से होकर गुजरती है यह ट्रेन
वैसे तो आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोगों के पास ही अपने लिए भी समय नहीं है। हर कोई इस रफ्तार में बस भाग ही रहा है, लेकिन पहुंचना कहा हैं... शायद किसी को पता भी नहीं है। ज्यादातर लोग एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने के लिए तेज रफ्तार ट्रेन या हवाई जहाज की यात्रा करते हैं, ताकि वह समय से पहुंच सकें। लेकिन जिस सुस्त रफ्तार ट्रेन की हम बात कर रहे हैं, उसमें किसी को जल्दी नहीं है। यह देश की सबसे सुस्त रफ्तार ट्रेन है। लेकिन इसमें सफर करने पर 5 घंटे में सिर्फ 46 किमी की यात्रा करके भी आप खुश होंगे। आपके पास आनंद के क्षण होंगे, सुनाने को कहानियां होंगी। कई खूबसूरत तस्वीरें होंगी और साथ में सफर करने वाले लोगों के साथ बिताए लम्हों की यादें होंगी।
जैसा कि हमने ऊपर ही बताया, मेट्टुपलयम से ऊटी के बीच चलने वाली यह देश की सबसे सुस्त रफ्तार ट्रेन है। उसे मेट्टुपलयम-ऊटी पैसेंजर ट्रेन भी कहा जाता है। नीलगिरी माउंटेन रेलवे की इस ट्रेन को ऊटी टॉय ट्रेन भी कहा जाता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि देश की सबसे सुस्त ट्रेन की रफ्तार देश की सबसे तेज ट्रेन के मुकाबले कहां ठहरती है तो बता दें की यह सबसे तेज ट्रेन से 16 गुना स्लो चलती है। लेकिन स्लो होने के बावजूद यह आपको वैसे अनुभव देगी, जो तेज रफ्तार ट्रेन कभी नहीं देगी। यह ट्रेन केलर, कुन्नूर, वेलिंगटन, लवडेल और फर्न हिल जैसे खूबसूरत स्टेशनों से होकर गुजरती है। धीमी रफ्तार से चलती इस ट्रेन से आप बड़े ही इत्मिनान से नजारों को अपनी आंखों में बसा सकते हैं या कैमरे में कैद कर सकते हैं।
इस ट्रेन में बड़ी-बड़ी खिड़कियां लगाई गई हैं, ताकि आप नीलगिरी की पहाड़ियों का भरपूर लुत्फ उठा सकें। मीटर गेज के ट्रैक पर चलने वाली यह ट्रेन रूट में कुल 16 टनल, 250 ब्रिज और 200 से ज्यादा घुमावदार मोड़ों से गुजरती है। यहां से गुजरते हुए आप एक-एक पल और नजारे का भरपूर लुत्फ लेते हैं।
नीलगिरी माउंटेन रेलवे की शुरुआत कब हुई?

यह ट्रेन अब भी स्टीम इंजन से चलती है
नीलगिरी माउंटेन रेलवे की शुरुआत तो 1854 में हो गई थी, लेकिन यहां के पहाड़ों पर रेलवे का निर्माण 1891 में शुरू हो पाया। 1908 तक यह रूट बनकर तैयार हो गया। यह देश में इकलौती लाइन है, जिस पर पुराने स्टीम इंजन अब भी चल रहे हैं और यह अपने यात्रियों को इतिहास की याद दिलाती रहती है। अब इसका संचालन साउथ रेलवे करती है। साल 2005 में UNESCO ने इसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिया और इसे दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे के एक्सटेंशन के रूप में मान्यता दी।
इस ट्रेन में बैठने की दो तरह की व्यवस्था है। ट्रेन में कुल 72 सीटें फर्स्ट क्लास हैं, जबकि जनरल क्लास के लिए 100 सीटें हैं। पर्यटकों की मांग को देखते हुए साल 2016 में इसमें एक अतिरिक्त कोच जोड़ा गया है। यह ट्रेन सुबह 7:10 बजे मेट्टुपलयम से चलकर दोपहर करीब 12 बजे ऊटी पहुंचती है। वापसी में यह ट्रेन दोपहर 2 बजे ऊटी से चलकर शाम करीब 5.30 बजे मेट्टुपलयम पहुंचती है। अगर आप भी इस ट्रेन की यात्रा करना चाहते हैं तो आप IRCTC की वेबसाइट से अपने लिए टिकट बुक कर सकते हैं।
