सीकर में एक कमरे की दीवारों के बीच अब सन्नाटा है। किताबें खुली रह गई हैं, नोट्स वैसे ही पड़े हैं और एक सपना अधूरा रह गया है। 22 वर्षीय प्रदीप माहीच, जो डॉक्टर बनने का सपना लेकर पिछले तीन-चार वर्षों से नीट की तैयारी कर रहा था, अब इस दुनिया में नहीं है।
गुढ़ा गौड़जी कस्बे के बाड्या नला गांव का रहने वाला प्रदीप अपने परिवार की उम्मीदों का सबसे बड़ा सहारा था। तीन बहनों का इकलौता भाई और एक गरीब परिवार का बेटा। पिता भारी किल्लत के बावजूद बेटे को पढ़ा रहे थे, ताकि एक दिन घर की किस्मत बदल सके।
परिजनों के मुताबिक, इस बार प्रदीप को पूरा भरोसा था कि उसका चयन हो जाएगा। 3 मई को हुई नीट परीक्षा के बाद वह बेहद खुश था। उसने माता-पिता और दोस्तों से कहा था कि उसके करीब 650 अंक आ सकते हैं और इस बार मेडिकल कॉलेज में दाखिला लगभग तय है। परिवार भी सालों की मेहनत रंग लाने की उम्मीद में खुश था। परीक्षा के बाद जब वह कुछ दिनों के लिए घर लौटा, तो उसकी आंखों में एक अलग चमक थी। उसने घरवालों से कहा था कि 15 मई तक कमरे का किराया जमा है, उसके बाद वह सामान लेकर घर आ जाएगा। मानो संघर्ष के लंबे दौर के बाद अब जिंदगी बदलने वाली थी… लेकिन फिर परीक्षा रद्द होने की खबर आई।
परिवार बताता है कि इसके बाद प्रदीप अचानक बदल गया। जो लड़का कुछ दिन पहले तक सपनों की बातें कर रहा था, वह चुप रहने लगा। पिछले चार दिनों से वह गहरे तनाव में था। उसे बार-बार यही चिंता सता रही थी कि अब फिर से वही तैयारी, वही दबाव और वही अनिश्चितता।
शुक्रवार सुबह भी उसकी अपने पिता राजेश से फोन पर बात हुई थी। परिवार रोज की तरह उसके लिए दूध और छाछ बस से सीकर भेजने की तैयारी कर रहा था। सुबह प्रदीप ने पहले घर पर फोन किया, लेकिन परिवार के लोग काम में व्यस्त होने के कारण कॉल नहीं उठा सके। बाद में उसने पिता से बात कर दूध और छाछ भेजने को कहा। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उसकी आखिरी बातचीत होगी। कुछ देर बाद आत्महत्या की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।
जिस बेटे को डॉक्टर बनाकर परिवार अपने संघर्षों का अंत देखना चाहता था, उसकी मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सिर्फ एक परीक्षा रद्द हुई थी, या लाखों छात्रों का मानसिक संतुलन और भरोसा भी टूट गया? कोटा, सीकर और देश के कई कोचिंग हब में हजारों छात्र सालों से दबाव, उम्मीद और प्रतिस्पर्धा के बीच जिंदगी जी रहे हैं। प्रदीप की कहानी सिर्फ एक छात्र की नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं की कहानी है, जिनके सपने एक परीक्षा के भरोसे टिके होते हैं।
