वाराणसी में सम्राट विक्रमादित्य का शौर्य: जब मंच पर उतरे हाथी-घोड़े और जीवंत हुआ 2000 साल पुराना समय

धर्म नगरी वाराणसी में 3 अप्रैल की शाम इतिहास के पन्नों से जीवंत होकर निकली। अवसर था उज्जैन के प्रतापी राजा सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित भव्य महानाट्य का, जिसने वाराणसी के BLW मैदान में मौजूद हजारों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया।

महाकाल की धरा और बाबा विश्वनाथ की नगरी का मेलImage Credit : TNN01 / 07

महाकाल की धरा और बाबा विश्वनाथ की नगरी का मेल

वाराणसी का वातावरण उस समय पूरी तरह बदल गया जब मध्य प्रदेश के उज्जैन (महाकाल की नगरी) की सांस्कृतिक विरासत काशी (विश्वनाथ की नगरी) के आंगन में पहुंची। महानाट्य 'सम्राट विक्रमादित्य' के माध्यम से न केवल एक राजा की कहानी कही गई, बल्कि दो ऐतिहासिक शहरों के बीच सांस्कृतिक एकता का एक नया सेतु निर्मित हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' अभियान का एक सशक्त हिस्सा बताया।

मंच पर जीवंत हुआ विक्रमादित्य का पराक्रमImage Credit : TNN02 / 07

मंच पर जीवंत हुआ विक्रमादित्य का पराक्रम

2000 साल पुरानी गौरवशाली संस्कृति और परंपरा को जब कलाकारों ने मंच पर उतारा, तो दर्शक रोमांच से भर गए। सम्राट विक्रमादित्य के अदम्य साहस, अनुशासन और उनके न्यायप्रिय शासन के दृश्यों ने लोगों को उस युग में पहुंचा दिया। विशेष रूप से जब मंच पर असली हाथी और घोड़ों का प्रवेश हुआ, तो मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

तीन महान भाइयों का स्मरणImage Credit : TNN03 / 07

तीन महान भाइयों का स्मरण

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय इतिहास और पुराणों की तीन प्रसिद्ध जोड़ियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह भगवान राम-लक्ष्मण और श्री कृष्ण-बलराम की जोड़ी विख्यात है, वैसी ही महान जोड़ी महाराज भर्तृहरि और सम्राट विक्रमादित्य की रही है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को दानशीलता और पुरुषार्थ के नायक विक्रमादित्य के जीवन से परिचित कराना सौभाग्य की बात है।

काल गणना और पंचांग का अनूठा समावेशImage Credit : TNN04 / 07

काल गणना और पंचांग का अनूठा समावेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उज्जैन और बनारस के ज्ञान-विज्ञान के संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि उज्जैन 'काल गणना' की धरती है, तो बनारस 'पंचांग' की धरती है। इन दोनों का समावेश भारतीय काल गणना को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाएगा। उन्होंने महाराज भर्तृहरि के नाथ संप्रदाय से जुड़े होने पर भी गर्व व्यक्त किया, जिससे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के आध्यात्मिक संबंध और गहरे होते हैं।

नई पीढ़ी के लिए मूल्यों और आदर्शों का पाठImage Credit : TNN05 / 07

नई पीढ़ी के लिए मूल्यों और आदर्शों का पाठ

योगी आदित्यनाथ ने डॉ. मोहन यादव की तारीफ करते हुए कहा कि यह केवल एक नाटक नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली अतीत, मूल्यों और आदर्शों से जोड़ने का एक वृहद् अभियान है। उन्होंने कहा कि जो समय की गति को पहचानकर खुद को तैयार करता है, उस पर महाकाल की कृपा सदैव बनी रहती है।

मोहन यादव ने भेंट की 'वैदिक घड़ी'Image Credit : TNN06 / 07

मोहन यादव ने भेंट की 'वैदिक घड़ी'

इस ऐतिहासिक अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने योगी आदित्यनाथ को एक विशेष 'वैदिक घड़ी' भेंट की। यह घड़ी प्राचीन वैदिक परंपरा और आधुनिक विज्ञान का अद्भुत मिश्रण है, जो काल की अचूक गणना करती है। इसे बाबा विश्वनाथ के मंदिर में स्थापित किया जाएगा, ताकि प्राचीन भारतीय काल गणना की पद्धति को जन-जन तक पहुंचाया जा सके।

विकास के नए पैमाने: केन-बेतवा और सांस्कृतिक साझापनImage Credit : TNN07 / 07

विकास के नए पैमाने: केन-बेतवा और सांस्कृतिक साझापन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश की राजनीतिक धारा बदल रही है। अब सरकारें न केवल विकास बल्कि सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए भी साथ मिलकर काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारें केन-बेतवा नदी जोड़ो अभियान जैसी बड़ी योजनाओं के साथ-साथ सांस्कृतिक एकता के क्षेत्रों में भी नए पैमाने गढ़ रही हैं।

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