Hemant Soren: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिख रही हैं। बड़गाईं इलाके की 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रांची की विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। शनिवार को अदालत में मुख्यमंत्री के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए जाने थे, लेकिन वह उपस्थित नहीं हो सके।
उनके वकील ने व्यस्त आधिकारिक दिनचर्या का हवाला देते हुए नई तारीख देने का अनुरोध किया। इस पर अदालत ने निर्देश जारी किया कि मुख्यमंत्री सोमवार शाम 4:00 बजे तक शारीरिक रूप से या वर्चुअल माध्यम से हर हाल में कोर्ट के समक्ष पेश हों। इससे ठीक पहले झारखंड हाईकोर्ट से भी मुख्यमंत्री को बड़ा झटका लगा। हाईकोर्ट ने विशेष अदालत की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने की सोरेन की याचिका को खारिज कर दिया।
टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें: 'और कितनी मौतों के बाद जागेगा प्रशासन', IIT बॉम्बे में 6 महीने में तीसरी मौत पर अभिजीत दिपके का फूटा गुस्सा
सोरेन के वकील ने तर्क दिया था कि एक लोक सेवक होने के नाते उन पर मुकदमा चलाने के लिए राज्यपाल की पूर्व स्वीकृति नहीं ली गई है। हालांकि, न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की एकल पीठ ने इस दलील को नकार दिया। अदालत ने कहा कि कानून का संरक्षण केवल वैध सरकारी कामकाज के लिए होता है, इसे आपराधिक आरोपों से बचने के लिए ढाल नहीं बनाया जा सकता।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमीन के रिकॉर्ड में हेरफेर करने जैसे आरोपों का सरकारी कर्तव्यों के पालन से कोई सीधा संबंध प्रतीत नहीं होता। ऐसे में बिना पूर्व स्वीकृति के भी मुकदमे की शुरुआती प्रक्रिया को रोकना उचित नहीं होगा। हाईकोर्ट के इस रुख के बाद निचली अदालत के लिए कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। अब सभी की निगाहें सोमवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री अदालत के सामने किस रूप में पेश होते हैं।
