राँची

देशभर में बड़ी संख्या में संघ से जुड़ रही युवा शक्ति; 24 हजार कार्यकर्ताओं ने लिया प्रशिक्षण

ज्वाइन आरएसएस के माध्यम से हर वर्ष एक लाख से अधिक लोग संपर्क कर रहे हैं। 2024 में आयोजित प्रशिक्षण वर्गों में 24 हजार कार्यकर्ताओं ने प्रशिक्षण लिया। बता दें, देशभर में युवा शक्ति बड़ी संख्या में संघ से जुड़ रही है।

Image

रांची में अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक।

Ranchi News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि देश की युवा शक्ति काफी संख्या में संघ से जुड़ने की इच्छा व्यक्त कर रही है, और जुड़ भी रहे हैं। संघ ने वर्ष 2012 में ज्वाइन आरएसएस (वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन) के तहत एक ऑनलाइन माध्यम प्रारंभ किया था। इसके अंतर्गत ऑनलाइन माध्यम से प्रतिवर्ष एक से सवा लाख लोग संघ के साथ विविध गतिविधियों में जुड़ रहे हैं। इस वर्ष भी जून के अंत तक 66529 लोगों ने संपर्क कर संघ से जुड़ने की इच्छा व्यक्त की है।

संघ की ट्रेनिंग में किए गए कुछ बदलाव

इस वर्ष से संघ प्रशिक्षण वर्गों की रचना व पाठ्यक्रम में परिवर्तन किया गया है। देशभर में 40 वर्ष से कम आयु के स्वयंसेवकों के लिए इस वर्ष कुल 72 वर्ग (संघ शिक्षा वर्ग- 60, कार्यकर्ता विकास वर्ग प्रथम- 11, कार्यकर्ता विकास वर्ग द्वितीय- 1) आयोजित हुए, इनमें कुल 20615 लोगों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।

40 से 65 वर्ष की आयु के लोगों के लिए आयोजित 18 वर्गों में 3335 शिक्षार्थियों ने भाग लिया। पिछले वर्ष आयोजित प्राथमिक शिक्षा वर्गों में एक लाख नए लोगों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। ऐसे ही नई रचना में सामान्य स्वयंसेवकों के लिए पहली बार प्रारंभिक वर्गों (तीन दिवसीय) का आयोजन देशभर में हो रहा है, जिसमें प्राथमिक से दोगुनी संख्या में युवा सहभागी हो रहे हैं।

रांची में हुई अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक

सुनील आंबेकर ने रांची में अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक के अंतिम दिन आयोजित प्रेस वार्ता में बैठक के संबंध में जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि बैठक में कुल 227 कार्यकर्ता देशभर से अपेक्षित थे. बैठक में संगठन दृष्टि से महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन हुआ। प्रेस वार्ता में झारखंड प्रांत संघचालक सच्चिदानंद लाल, अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख द्वय नरेंद्र कुमार व प्रदीप जोशी भी उपस्थित रहे।

अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक (12, 13, 14 जुलाई) का आयोजन रांची के सरला बिरला विश्वविद्यालय परिसर में किया गया था। आपसी विचार विमर्श के लिए विविध संगठनों की समन्वय बैठक 31 अगस्त, 1, 2 सितंबर 2024 को केरल के पलक्कड़ में होगी।

विजयादशमी 2025 के लिए क्या है प्लान?

सुनील आंबेकर ने बताया कि विजयादशमी 2025 (100 वर्ष पूरे होने पर) तक देश में संघ कार्य विस्तार को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में सभी मंडल तथा शहरी क्षेत्रों में सभी बस्तियों में दैनिक शाखा का लक्ष्य तय किया है। मार्च 2024 तक देश में 58981 मंडलों में से 36823 मंडल में प्रत्यक्ष दैनिक शाखा है, ऐसे ही शहरी क्षेत्रों में 23649 बस्तियों में से 14645 बस्तियों में संघ कार्य है। शेष में साप्ताहिक अथवा मासिक संपर्क है। अभी देश में 73117 दैनिक शाखाएं, और 27717 साप्ताहिक मिलन चलते हैं। इसके अलावा जहां शाखा कार्य अथवा संपर्क नहीं है। संघ ऐसे 158532 गांवों में जागरण पत्रिकाओं के माध्यम से सकारात्मक संदेश, आध्यात्मिक विचार, संतों का संदेश लोगों तक पहुंचा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि अक्षत वितरण अभियान के दौरान 15 दिनों में देश के पौने छह लाख गांवों तक स्वयंसेवक पहुंचे थे।

आगामी योजना को लेकर बताया कि यह वर्ष पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर की त्रि-शताब्दी का वर्ष है। पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी ने अपने जीवन में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद एक आदर्श स्थापित किया। उनके जीवन संदेश, जीवन आदर्श को जन-जन तक पहुंचाने के लिए स्वयंसेवक समाज के साथ मिलकर वर्ष भर कार्य करेंगे। इसका शुभारंभ 31 मई को इंदौर से हो चुका है।

युवाओं से किया आह्वान, 24 घंटे गांव में रहो

ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की दृष्टि से गौ सेवा व ग्राम विकास को मिलाकर विशेष योजना बना रहे हैं। दोनों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रयास बढ़ाए जा रहे हैं, जिससे गांव की स्थिति बेहतर हो। युवाओं से भी आह्वान है कि 24 घंटे गांव में रहो, यह कार्य देखो व सहभागी बनो।

उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवक देशभर में सेवा कार्य कर रहे हैं। सेवा के साथ स्वावलंबन पर भी बल दिया जाता है। जिससे सेवा प्राप्त करने वाला स्वावलंबी बने। जहां-जहां भी संघ के स्वयंसेवक हैं, मणिपुर सहित उन सभी स्थानों पर स्वयंसेवक निरंतर सेवा कार्य करते हैं, और कर रहे हैं।

पंच परिवर्तन के विषयों को लेकर तैयारी जारी

पर्यावरण संरक्षण को लेकर संघ की गतिविधियों को भी समाज से अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। पंच परिवर्तन के विषयों को लेकर तैयारी भी चल रही है और समाज में निरंतर संपर्क भी चल रहा है। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि संघ सीधे चुनाव के कार्य में नहीं लगता। संघ लोकमत परिष्कार, लोकमत जागरण का कार्य करता है। इस बार भी स्वयंसेवकों ने छोटी-छोटी गोष्ठियों के माध्यम से लोकमत परिष्कार का कार्य किया था। लोकतंत्र में लोक सबसे ऊपर है। सभी दल अपनी-अपनी बात लेकर जाते हैं और जनता ने उस पर अपना निर्णय दिया है। उसका सभी को सम्मान करना चाहिए।

मतांतरण पर उन्होंने कहा कि धोखे से, जबरन, लालच से मतांतरण नहीं होना चाहिए, यह पूर्णतया गलत है। इसे रोकने के लिए कानून भी हैं। सभी को कानून का पालन करना चाहिए। जनसंख्या असंतुलन पर पूर्व में सरसंघचालक जी अपने उद्बोधन में बता चुके हैं। जनसंख्या असंतुलन को लेकर समाज को भी चिंता करनी चाहिए, और इस संबंध में जो भी करणीय होगा संघ उस दृष्टि से आगे बढ़ेगा। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि आपातकाल लगाना गलत था, लोकतंत्र में ऐसी बातें नहीं होनी चाहिए। आपातकाल के विरोध में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने संघर्ष भी किया था, और संघ के सैकड़ों कार्यकर्ताओं को प्रताड़ना भी झेलनी पड़ी थी।

(प्रेस रिलीज)

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article