राँची

झारखंड में महिला और लड़की की रेप के बाद हत्या, कब्र से लाश निकाल कर...

झारखंड के रांची में एक महिला की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई। इसके अलावा एक आदिवासी नाबालिग लड़की की भी रेप के बाद हत्या कर शव फेंक दिया गया।

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रांची महिला से रेप और हत्या

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

रांची: झारखंड में दो जघन्य घटनाओं को अंजाम दिया गया है। पहला रांची के पिठौरिया थाना क्षेत्र में 45 साल की एक महिला की लाश गुरुवार को ओखरगड़ा जंगल से बरामद की गई। महिला के पुत्र ने दुष्कर्म के बाद उनकी हत्या की आशंका जताई है। महिला बुधवार से लापता थी। उसके घर वाले तलाश में जुटे थे, लेकिन कुछ पता नहीं चल पा रहा था। गुरुवार को कुछ लोगों ने जंगल में लाश देखी। इसके बाद सूचना पाकर पुलिस पहुंची। शव की शिनाख्त एक दिन पहले से लापता महिला के रूप में की गई है। पुलिस ने उनके पुत्र के बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज की है।

13 साल की आदिवासी लड़की से हैवानियत

एक अन्य घटना में, झारखंड के पलामू जिले के रामगढ़ की 13 साल की आदिवासी बालिका से बिहार के सासाराम में रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई। उसे ट्रैफिकिंग कर बिहार ले जाया गया था। उसके परिजनों ने पलामू पुलिस के पास इसकी शिकायत दर्ज की। इसके बाद बिहार पुलिस को इसकी सूचना दी गई। गुरुवार को सासाराम पुलिस ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में लड़की की दफनाई गई लाश कब्र से निकाली। बताया गया कि लड़की को कुछ महीने पहले ईंट भट्ठे में काम करने के लिए उसके गांव से सासाराम ले जाया था। उसके पिता की मौत हो चुकी है, जबकि मां ने दूसरी शादी कर ली है।

एक स्थानीय ठेकेदार उसे अपने साथ ले गया था और ईंट भट्ठा मालिक को सौंप दिया था। लड़की के रेप और मर्डर के आरोप में ठेकेदार और ईंट भट्ठा मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस बीच पलामू पुलिस की एक टीम आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए सासाराम रवाना हुई है।

(इनपुट - आईएनएस)

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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