राँची

झारखंड चुनाव से पहले एक्शन मोड में हेमंत सोरेन, कई IAS अधिकारियों का हुआ तबादला; देखें लिस्ट

Jharkhand: झारखंड में दो दर्जन से अधिक आईएएस अधिकारियों का तबादला किया गया है। राज्य में इसी वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं, जिससे पहले सीएम हेमंत सोरेन फुल ऑन एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। बड़े पैमाने पर आईएएस अफसरों के तबादला वाली सूची में नितिन मदन कुलकर्णी और अरवा राजकमल भी शामिल हैं।

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हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखंड।

Ranchi News: विधानसभा चुनाव से पहले हेमंत सोरेन की सरकार ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर आईएएस अधिकारियों का तबादला किया है। झारखंड सरकार ने नौकरशाही में बड़े पैमाने पर फेरबदल करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के दो दर्जन से अधिक अधिकारियों का तबादला कर दिया। इनमें राज्यपाल के प्रधान सचिव नितिन मदन कुलकर्णी भी शामिल हैं जिनके स्थान पर विप्र भाल को नियुक्त किया गया है।

बड़े पैमाने पर आईएएस अधिकारियों का तबादला, देखें लिस्ट

कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा शनिवार देर रात जारी अधिसूचना के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग के सचिव पद पर तैनात 2006 बैच के आईएएस अधिकारी भाल का तबादला कर उन्हें राज्यपाल का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है।

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झारखंड में IAS अधिकारियों का तबादला।

कुलकर्णी को कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है। योजना एवं विकास विभाग के प्रधान सचिव मस्त राम मीणा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के प्रधान सचिव का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे।

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झारखंड में IAS अधिकारियों का तबादला

पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव के पद पर तैनात सुनील कुमार नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव, ज्यूको के प्रबंध निदेशक तथा ग्रेटर रांची विकास एजेंसी (जीआरडीए) के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार संभालते रहेंगे।

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झारखंड में IAS अधिकारियों का तबादला

अधिसूचना के अनुसार खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव अमिताभ कौशल को सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। उनके पास झारखंड, रांची के वाणिज्यिक कर विभाग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा।

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झारखंड में IAS अधिकारियों का तबादला

भवन निर्माण विभाग के सचिव मनीष रंजन अब रांची स्थित प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक होंगे। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव राजेश कुमार शर्मा को आपदा प्रबंधन विभाग का सचिव बनाया गया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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