घाटशिला उपचुनाव में झामुमो ने रचा इतिहास
Ghatsila Bypoll Result: घाटशिला विधानसभा उपचुनाव ने शुक्रवार को नया इतिहास रचते हुए झामुमो उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन को क्षेत्र का पहला ऐसा नेता बना दिया, जिन्होंने एक लाख से अधिक वोट हासिल किए। उन्होंने कुल 1,04,936 मत प्राप्त कर न केवल एक नया कीर्तिमान स्थापित किया, बल्कि अपने दिवंगत पिता और पूर्व विधायक रामदास सोरेन के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। उपचुनाव में उन्हें भाजपा उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन पर 38,601 वोटों की प्रचंड बढ़त मिली।
घाटशिला के चुनावी इतिहास में सबसे अधिक वोट पाने का रिकॉर्ड पहले उनके पिता, रामदास सोरेन, के नाम था, जिन्होंने 2024 के आम चुनाव में 98,356 वोट प्राप्त किए थे। बेटे सोमेश ने यह रिकॉर्ड तोड़ते हुए न सिर्फ आंकड़ा पार किया, बल्कि अपने प्रतिद्वंद्वी पर जीत का अंतर भी कई गुना बढ़ा दिया। भाजपा उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन को इस चुनाव में 66,270 मत मिले और अन्य 11 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई।
विधायक रामदास सोरेन का 15 अगस्त को निधन होने के बाद यह उपचुनाव हुआ। झामुमो ने उनकी राजनीतिक विरासत को संभालने की जिम्मेदारी उनके पुत्र सोमेश चंद्र सोरेन को दी। यह पहला मौका था जब सोमेश किसी चुनावी मैदान में उतरे थे। भाजपा ने इस उपचुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल मानते हुए पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन को प्रत्याशी बनाया।
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घाटशिला उपचुनाव में झामुमो और भाजपा, दोनों ने ही 40-40 स्टार प्रचारकों के साथ पूरी ताकत झोंक दी थी। हालांकि मैदान में बाजी हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन की जोड़ी ने मार ली। हेमंत की रणनीति और कल्पना की जनसंपर्क शैली ने झामुमो के जनाधार को पहले से अधिक मजबूत कर दिया। कल्पना सोरेन की सभाओं में महिलाओं की भारी भागीदारी ने झामुमो के वोट बैंक में निर्णायक बढ़ोतरी की।
भाजपा ने केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, गीता कोड़ा और बंगाल की विधायक अग्निमित्रा पाल को झामुमो के महिला प्रभाव को टक्कर देने के लिए उतारा, लेकिन कल्पना सोरेन की लोकप्रियता के सामने यह रणनीति कारगर नहीं हो सकी। पांच पूर्व मुख्यमंत्रियों, बाबूलाल मरांडी, चंपई सोरेन, मधुकोड़ा, अर्जुन मुंडा और रघुवर दास की राजनीतिक मौजूदगी भी भाजपा के पक्ष में हवा नहीं बना सकी।
विश्लेषकों का मानना है कि दिवंगत रामदास सोरेन के निधन के बाद उपजी सहानुभूति, हेमंत सोरेन सरकार के कामकाज पर भरोसा और कल्पना सोरेन की सक्रियता ने मिलकर यह ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित की। मतगणना में शुरू से ही बढ़त बनाए रखने वाले सोमेश सोरेन की जीत ने यह स्पष्ट कर दिया कि घाटशिला की जनता का विश्वास झामुमो और सोरेन परिवार में अटूट है। झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि झारखंड की धरती ने एक बार फिर भाजपा को नकार दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि चंपाई सोरेन की राजनीतिक प्रभाव-क्षमता सिर्फ झामुमो के भीतर थी, जिसका असर पार्टी से बाहर निकलने पर समाप्त दिखाई दे रहा है। इस जीत के साथ झामुमो ने घाटशिला में अपना गढ़ और मजबूत कर लिया है।