मुंबई : 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा शिक्षा प्रणाली में सुधार और कथित पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर 20 जुलाई को किए गए 'संसद चलो' मार्च के दौरान पुलिस द्वारा छात्रों पर किए गए बल प्रयोग ने राजनीतिक गलियारों में उबाल ला दिया है। शिवसेना (यूबीटी) विधायक आदित्य ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
आदित्य ठाकरे ने छात्रों के भविष्य पर पूछे सवाल
शिवसेना (यूबीटी) की 'तिरंगा रैली' को संबोधित करते हुए आदित्य ठाकरे ने छात्रों के भविष्य और संवैधानिक मूल्यों को लेकर सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने छात्रों से सीधे संवाद करते हुए पूछा कि क्या वे उन लोगों का साथ देंगे जिन्होंने उनके परीक्षा के पेपर लीक किए? आदित्य ने लाठीचार्ज, आंसू गैस के इस्तेमाल और संविधान के अनादर का मुद्दा उठाते हुए सरकार से सवाल किया कि वे कब तक चुप रहेंगे? उन्होंने स्पष्ट रूप से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को दोहराते हुए कहा कि जब भी सरकार से जवाबदेही मांगी जाती है, तो वे धार्मिक राजनीति का सहारा लेकर मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि ऐसे लोग जरूरत के समय देश छोड़कर भागने में भी संकोच नहीं करते।
राज ठाकरे पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
वहीं, मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने 'एक्स' पर एक पोस्ट के माध्यम से दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को 'बदले' की भावना से प्रेरित करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए किया गया हल्का लाठीचार्ज तो समझ में आता है, लेकिन जो वीडियो सामने आए हैं उनमें राहगीरों तक को पीटा जा रहा है, जो पुलिस की बर्बरता को दर्शाता है। राज ठाकरे ने स्पष्ट किया कि पुलिसकर्मी अक्सर उच्च अधिकारियों के आदेशों का पालन करने के लिए मजबूर होते हैं, इसलिए इस हिंसा के लिए केवल वे जिम्मेदार नहीं हैं। उन्होंने शासन प्रणाली से सवाल किया कि आखिर उन्हें छात्रों के खिलाफ इतने 'बेरहम' आदेश देने का अधिकार किसने दिया?
राज ठाकरे ने आगे मांग उठाई कि यदि शारीरिक सजा देने पर शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है, तो यही नियम उन पुलिसकर्मियों और उन्हें आदेश देने वाले अधिकारियों पर भी लागू होना चाहिए जिन्होंने छात्रों को निशाना बनाया। दोनों नेताओं के इन तीखे बयानों ने दिल्ली में हुए प्रदर्शन को एक बड़ी राजनीतिक बहस में तब्दील कर दिया है। जहाँ एक तरफ आदित्य ठाकरे ने सत्ता पक्ष की मंशा और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर जोर दिया है, वहीं राज ठाकरे ने पुलिसिया कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है। यह पूरा घटनाक्रम सरकार पर बढ़ रहे दबाव को दर्शाता है, जहाँ विपक्ष अब छात्रों के मुद्दे को लेकर सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।
