रायपुर

Chhattisgarh: स्वतंत्रता दिवस समारोह में नहीं उड़ा कबूतर, तो एसपी ने की कार्रवाई की मांग; जानें सारा माजरा

Chhattisgarh News: सोशल मीडिया पर छत्तीसगढ़ के मुगेली का एक वीडियो खूब वायरल हुआ, जिसमें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान एसपी ने जिस कबूतर को छोड़ा था वो उड़ नहीं पाया। अब पुलिस अधीक्षक ने कलेक्टर को चिट्ठी लिखी है और लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। आपको सारा माजरा जानना चाहिए।

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कबूतर की फाइल फोटो।

Pigeon fails to fly Video: छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है, क्योंकि पुलिस अधीक्षक द्वारा छोड़े गए कबूतर के उड़ न पाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस घटना के बाद, घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोगों ने इसकी तुलना लोकप्रिय वेब सीरीज 'पंचायत' सीजन 3 के एक दृश्य से करना शुरू कर दिया।

SP ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की

घटना के बाद, अधिकारी ने घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान, भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री पुन्नूलाल मोहले, कलेक्टर राहुल देव और पुलिस अधीक्षक (एसपी) गिरिजा शंकर जायसवाल ने शांति और स्वतंत्रता का प्रतीक कबूतर उड़ाया। इस दौरान विधायक द्वारा छोड़ा गया कबूतर उड़ गया, जबकि एसपी द्वारा छोड़ा गया कबूतर जमीन पर गिर गया। एसपी ने कलेक्टर को लिखे पत्र में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की।

कबूतर के गिरने की घटना का वीडियो हुआ वायरल

कलेक्टर को लिखे पत्र में एसपी ने लिखा है कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय महत्व के आयोजन के दौरान कबूतर के जमीन पर गिरने की घटना को सोशल मीडिया पर प्रमुखता से प्रसारित किया गया। जिला स्तर पर आयोजित मुख्य ध्वजारोहण कार्यक्रम में बीमार कबूतर को उड़ाने के लिए प्रस्तुत किए जाने के कारण यह स्थिति निर्मित हुई। यदि यह घटना मुख्य अतिथि के साथ घटित होती तो स्थिति और अधिक अप्रिय हो सकती थी।

पत्र में आगे बताया गया है कि स्वतंत्रता दिवस से पूर्व सभी विभागाध्यक्षों की बैठक आयोजित कर उन्हें अपने-अपने कार्य सही ढंग से करने के निर्देश देकर जिम्मेदारी दी गई थी, ताकि स्वतंत्रता दिवस समारोह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो सके। निश्चित रूप से इस कार्य के लिए जिम्मेदार अधिकारी ने अपनी जिम्मेदारी का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया है। इसलिए घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित है।

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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