देशभर में रिकॉर्डतोड़ बारिश की खबरें आपने खूब सुनी और पढ़ी होंगी। इन दिनों देशभर में भारी बारिश का दौर जारी है। उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में बादल फटने की घटनाओं के चलते भारी तबाही के मंजर देखने को मिल रहे हैं। फ्लैश फ्लड, भारी बारिश और बाढ़ के साथ ही भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड की घटनाएं आए दिन सामने आ रही हैं। मैदानी इलाकों में भी नदियां अपने तटबंध तोड़कर रिहायशी इलाकों तक पहुंच रही हैं। खेत जलमग्न हैं और फसलें बाढ़ के पानी में डूबकर बर्बाद हो चुकी हैं। भारी और अत्यंत भारी बारिश से जुड़ी तमाम खबरों के बीच देश के कुछ इलाकों में बारिश की भारी कमी देखने को मिल रही है। कम से कम देश के दो राज्यों में तो बादलों का भीषण टोटा है और यहां के निवासियों व किसानों की आंखें आसमान की ओर निहारते हुए पथरा सी गई हैं।
एक तरफ उत्तर भारत में बाढ़ और लैंडस्लाइड से लगातार लोग जान गंवा रहे हैं। गंगा-यमुना के मैदानी इलाके डूबे हुए हुए हैं। मौसम विभाग की मानें तो इस मानसून के मौसम में बहुत ज्यादा बारिश नहीं हुई है। इसके बावजूद कुछ इलाकों में बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से जुड़ी घटनाएं आए दिन सामने आ रही हैं।
75 फीसद मानसून बीता
मौसम विभाग के अनुसार मानसून का 75 फीसद हिस्सा बीत चुका है। जैसा कि हमने ऊपर बताया कि मौसम विभाग के अनुसार इस बार बहुत ज्यादा बारिश नहीं हुई है। इस साल 31 अगस्त तक हुई बारिश 1971-2020 के औसत से मात्र 1.2 फीसद ही ज्यादा है। इसके बावजूद उत्तर भारत से लेकर पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत तक के कई इलाकों में बाढ़ से लोग परेशान हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश के साथ ही उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में अग्सत महीने में भारी बारिश ने तबाही ला दी।
मौसम विभाग के अनुसार अगस्त तक पूरे देश में 700.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है। IMD के अनुसार जून से अगस्त तक के महीनों के लिए यह बारिश की मध्यम मात्रा है। यानी इसे बहुत कम या बहुत ज्यादा नहीं कहा जा सकता।
यहां बादलों का टोटा है
जहां एक ओर मानसून के सीजन में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और पंजाब में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई। वहीं कुछ राज्यों में बादलों का टोटा भी देखने को मिला। राजस्थान में सामान्य से 56 फीसद ज्यादा बारिश हुई है, जबकि बिहार और उत्तर प्रदेश में इस मानसून के सीजन बादल कम बरसे। बिहार में तो 26.6 फीसद कम बारिश हुई, जिससे राज्य के कई इलाकों में सूखे जासे हालात हैं। ऐसा ही कुछ उत्तर-पूर्वी राज्य असम का भी है। असम में इस मानसून के सीजन 25.3 फीसद और ओडिशा में 12.6 व छत्तीसगढ़ में 10.8 फीसद कम बारिश रिकॉर्ड हुई है।
1971-2020 के औसत से 2025 में कितनी कम या ज्यादा बारिश हुई
| राज्य का नाम | इस सीजन कितनी कम या ज्यादा बारिश हुई |
| राजस्थान | 56.3 फीसद |
| हिमाचल प्रदेश | 45.4 फीसद |
| उत्तराखंड | 34.4 फीसद |
| जम्मू और कश्मीर | 34.4 फीसद |
| पंजाब | 28.8 फीसद |
| हरियाणा | 23.1 फीसद |
| तेलंगाना | 22.2 फीसद |
| झारखंड | 21.8 फीसद |
| मध्य प्रदेश | 12.4 फीसद |
| कर्नाटक | 11.2 फीसद |
| आंध्र प्रदेश | 5.3 फीसद |
| केरल | 5.2 फीसद |
| गुजरात | 4.6 फीसद |
| दिल्ली | 1.3 फीसद |
| महाराष्ट्र | 0.3 फीसद |
| पश्चिम बंगाल | -3.3 फीसद |
| तमिलनाडु | -4.4 फीसद |
| उत्तर प्रदेश | -6.5 फीसद |
| छत्तीसगढ़ | -10.8 फीसद |
| ओडिशा | -12.6 फीसद |
| असम | -25.3 फीसद |
| बिहार | -26.6 फीसद |
इस तरह बारिश के औसत आंकड़ों को देखा जाए तो पता चलता है कि पैटर्न हर जगह अलग है। राजस्थान जैसे राज्यों में एक सामान्य पैटर्न दिखा, जहां पूरे मानसून के सीजन हर महीने काफी ज्यादा बारिश हुई। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और पंजाब जैसे राज्यों में भले ही बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से तबाही खूब मची हो, लेकिन यहां बारिश का पैटर्न अच्छा नहीं रहा। इन राज्यों के कुछ इलाकों में बहुत ज्यादा बारिश देखने को मिली और कुछ में सामान्य से कम। इसी तरह कुछ महीनों में ज्यादा बारिश तो कुछ में ना के बराबर बादल बरसे।
