चंद्रपुर : पूर्वी महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में मंगलवार को बाघ के हमलों की दो अलग-अलग घटनाओं में एक महिला और एक पुरुष की मौत हो गई। चंद्रपुर जिले में इस महीने अब तक बाघ के हमलों में कुल 11 लोगों की जान जा चुकी है। महाराष्ट्र के वन विकास निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहली घटना चिचपल्ली वन क्षेत्र में घटी, जहां मुल तहसील के चिरोली गांव निवासी नंदा संजय माकलवार (45) सुबह के समय अपने पति और कुछ अन्य लोगों के साथ बांस की लकड़ियां इकट्ठा करने जंगल गई थीं, तभी एक बाघ ने उन पर हमला कर दिया, जिससे उनकी जान चली गई। दूसरी घटना चिचपल्ली रेंज के अंतर्गत आने वाले इसी कंपार्टमेंट नंबर 524 में दोपहर के समय घटी, जहां मवेशियों को चराने के लिए गए कांटापेठ निवासी सुरेश सोपानकर (52) पर बाघ ने हमला कर दिया जिससे उनकी मौत हो गई।
ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व में बाघ ने किया था हमला
हाल ही में ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में बाघ ने दो लोगों पर हमला कर दिया था, जिससे वो बुरी तरह घायल हो गए और उनकी मौत हो गई थी। पहली घटना में वधोना गांव के 64 वर्षीय मारोती शेंडे पर ब्रह्मपुरी वन प्रभाग के तलोधी वन क्षेत्र में हमला हुआ, जहां वे तेंदू पत्ते इकट्ठा कर रहे थे। घायल शेंडे को तुरंत सिंदेवाही के ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। दूसरी घटना मुल तहसील के शिवपुर-चेक गांव के निवासी रुशी पेंडोर की है, जो शनिवार को लापता हो गए थे।
जानकारी के मुताबिक, 10 मई से अब तक चंद्रपुर जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण कुल आठ लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें सिंदेवाही तहसील में तीन महिलाओं पर हुए हमले भी शामिल हैं। वन विभाग ने स्थानीय लोगों को जंगल में सावधानी बरतने की सलाह दी है और बाघों के बफर जोन में आने को सामान्य बताया है। स्थानीय लोग इन हमलों से भयभीत हैं और प्रशासन से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की मांग कर रहे हैं। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे जंगल में अकेले न जाएं, समूह में जाएं और वन कर्मचारियों को सूचित करें। ये घटनाएं मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर करती हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां जंगल और मानव बस्तियां निकट हैं।
