दुनिया में बंदरों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन कुछ बंदर ऐसे हैं जिन्हें देखकर लोग पहली नजर में हैरान रह जाते हैं। ऐसा ही एक अनोखे बंदर के बारे में आज हम आपको बताएंगे। जो अपनी बड़ी और अजीब दिखने वाली नाक के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है।
हम जिस बंदर की बात कर रहे हैं, उसका नाम नाक वाला बंदर यानी प्रोबोसिस मंकी (Proboscis Monkey) है। इस बंदर की सबसे खास पहचान इसकी बड़ी और लटकती हुई नाक है। खासकर नर बंदरों की नाक इतनी बड़ी होती है कि यह उनके मुंह के नीचे तक लटकती दिखाई देती है।
इन बंदरों में सबसे खास बात तो यह है कि इनमें जिसकी जितनी बड़ी नाक होगी वह उतना ही खास होगा। इतना ही नहीं यह बंदर देखने में जितना अनोखा है, उतना ही अपनी तैराकी, छलांग और पेड़ों पर रहने की आदतों के कारण दिलचस्प भी है।
प्रोबोसिस मंकी दुनिया के हर जंगल में नहीं मिलता। यह केवल बोर्नियो द्वीप पर पाया जाता है, जो इंडोनेशिया, मलेशिया और ब्रुनेई के हिस्सों में बंटा हुआ है। इसका घर आमतौर पर नदियों के किनारे मौजूद जंगल, दलदली इलाके और मैंग्रोव वन होते हैं।
जहां दूसरे बंदर पानी को देखते ही दूर भागते हैं, वहीं इस बंदर को पानी के आसपास रहना इतना पसंद है कि यह अक्सर नदी या किसी जलस्रोत से ज्यादा दूर नहीं जाता। पेड़ों पर रहने के बावजूद इसका जीवन पानी से काफी गहराई से जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि इसे बंदरों की दुनिया का बेहतरीन तैराक भी माना जाता है।
अब सवाल उठता है कि आखिर इस बंदर की नाक इतनी बड़ी क्यों होती है? दरअसल, बड़ी नाक नर बंदरों की आवाज को खास बनाने में मदद करती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसकी नाक आवाज को गूंज देने वाले एक कक्ष की तरह काम कर सकती है, जिससे नर बंदर की आवाज ज्यादा गहरी और प्रभावशाली सुनाई देती है।
नर बंदर अपनी आवाज का इस्तेमाल दूसरे बंदरों को संकेत देने, समूह के साथ संपर्क बनाए रखने और प्रतिद्वंद्वी नर को प्रभावित करने के लिए कर सकते हैं। बड़ी नाक इनके लिए आकर्षण का एक हिस्सा भी मानी जाती है। वहीं, मादा बंदरों की नाक नर की तुलना में काफी छोटी होती है।
प्रोबोसिस मंकी की सबसे रोमांचक आदतों में से एक है पेड़ से सीधे पानी में छलांग लगाना। कई बार यह बंदर पेड़ की ऊंची शाखाओं से नदी में कूदता है और फिर तैरकर दूसरी तरफ पहुंच जाता है। इसके हाथों और पैरों की उंगलियों के बीच आंशिक झिल्ली होती है, जो इसे पानी में तैरने में मदद करती है। यह बंदर जरूरत पड़ने पर पानी के अंदर भी तैर सकता है। पानी में जाने की आदत इसे शिकारियों से बचने और नदियों को पार करने में मदद करती है।
इस बंदर का पेट भी इसकी पहचान का एक अनोखा हिस्सा है। इसका पेट अक्सर बड़ा और बाहर निकला हुआ दिखाई देता है। इसकी वजह इसका विशेष पाचन तंत्र है, जो पत्तियों और दूसरे पौधों से मिलने वाले भोजन को पचाने में मदद करता है। प्रोबोसिस मंकी मुख्य रूप से पत्तियां, बीज और कच्चे फल खाता है। इसके पेट में मौजूद सूक्ष्म जीव पौधों में पाए जाने वाले रेशों को तोड़ने में मदद करते हैं इसलिए इसका भोजन और पाचन तंत्र इसके शरीर की बनावट से जुड़ा हुआ है।
इतना अनोखा होने के बावजूद प्रोबोसिस मंकी सुरक्षित नहीं है। इसे विलुप्त होने के खतरे वाली प्रजाति की श्रेणी (Endangered) में रखा गया है। इसके सामने सबसे बड़ी चुनौती जंगलों का खत्म होना है। बोर्नियो में जंगलों की कटाई, खेती, तेल पाम के बागानों का विस्तार और दूसरे मानवीय कामों के कारण इनका प्राकृतिक आवास कम हो रहा है। जब नदियों और जंगलों के आसपास का इलाका नष्ट होता है, तो इन बंदरों के लिए भोजन, रहने और सुरक्षित तरीके से घूमने की जगह भी कम हो जाती है।