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Prayagraj News: पार्क की जमीन पर कब्जा करके बनाया कब्रिस्तान, 20 साल बाद मेयर की CM को लिखी चिट्ठी से हुआ खुलासा!

उत्तर प्रदेश की संगम नगरी प्रयागराज में पार्क की जमीन पर कथित अवैध कब्जे और उसे कब्रिस्तान में शामिल करने का मामला सामने आया है। मेयर की चिट्ठी पर DM ने जांच के लिए दो टीमें गठित कर दी हैं।

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प्रयागराज में पार्क की जमीन पर कब्जा कर कब्रिस्तान में मिलाने का आरोप

Prayagraj News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में करीब दो दशक पुराने पार्क की जमीन पर अवैध कब्जे और उसे कब्रिस्तान में शामिल किए जाने का मामला सामने आया है। यह खुलासा प्रयागराज के मेयर उमेश चन्द्र गणेश केसरवानी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखी चिट्टी से हुआ है। मेयर ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की जांच कराने और जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर दोबारा पार्क के रूप में बहाल करने की मांग की है।

मेयर की चिट्ठी के बाद CM Yogi Adityanath के दफ्तर ने मामले का संज्ञान लिया और प्रयागराज के डीएम को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके बाद डीएम मनीष कुमार वर्मा ने पूरे मामले की जांच के लिए राजस्व विभाग और प्रयागराज विकास प्राधिकरण की दो अलग-अलग टीमें गठित की हैं। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर जमीन की वास्तविक स्थिति और आगे की कार्रवाई तय होगी।

2006 तक था पार्क!

मेयर की चिट्ठी के मुताबिक, पटेल नगर हाउसिंग स्कीम, दरियाबाद के लेआउट प्लान में संबंधित जमीन को पार्क के लिए चिन्हित किया गया था। प्लान में इसे प्लेग्राउंड के तौर पर त्रिकोण के आकार में दर्शाया गया था। चिट्ठी में दावा किया गया है कि कॉलोनी के बच्चे लगभग 2006 तक यहां खेलने आते थे। इसके अलावा यहां सामाजिक गतिविधियां भी आयोजित होती थीं।

आरोप है कि साल 2006 में पार्क की जमीन को कथित तौर पर दरियाबाद कब्रिस्तान में शामिल कर दिया गया। मेयर की चिट्ठी में कहा गया है कि 14, 15 और 18 अगस्त 2006 की सार्वजनिक छुट्टियों के दौरान कथित तौर पर बड़ी संख्या में मजदूर लगाकर तीन दिनों में जमीन के चारों ओर कच्ची-पक्की दीवार खड़ी कर दी गई।

आजम-अतीक ने करवाया पार्क पर कब्जा

मेयर की चिट्ठी में तत्कालीन सपा सरकार के दौरान शहरी विकास मंत्री रहे मोहम्मद आजम खान पर अधिकारियों को कथित तौर पर धमकाने के भी आरोप लगाए गए हैं। चिट्ठी में यह भी आरोप लगाया गया है कि पार्क की जमीन को कब्रिस्तान में शामिल करने की कार्रवाई आजम खान और तत्कालीन माफिया अतीक अहमद की सहमति से हुई थी।

जांच टीम पुराने दस्तावेज खंगालेगी

हालांकि, ये मेयर की ओर से लगाए गए आरोप हैं, जिनकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो पाएगी। प्रशासन की गठित टीमें अब राजस्व रिकॉर्ड, विकास प्राधिकरण के लेआउट और जमीन की मौजूदा स्थिति सहित संबंधित दस्तावेजों की भी जांच करेंगी।

जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह साफ होगा कि जमीन का मूल रिकॉर्ड क्या है और 2006 में उसमें किस स्तर पर बदलाव हुआ। इसके आधार पर ही पार्क की जमीन को लेकर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय की जा सकती है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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