प्रयागराज

आजम खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर लगी रोक; जानें क्या है मामला

Azam Khan gets Relief: समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। आजम खान के वकील ने दलील दी कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की वजह से ही क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने के 18 साल बाद यह विरोध याचिका दाखिल की गई।

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आजम खान को हाईकोर्ट से मिली राहत।

Photo : BCCL

Court News: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रामपुर जिले के गंज थाना में 2007 में दर्ज एक मामले में समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान को राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की पीठ ने इस मामले में आजम खान की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजम खान को दी बड़ी राहत

इस मामले के तथ्यों के मुताबिक, अफसर खान नाम के एक व्यक्ति ने 2007 में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि आजम खान के इशारे पर उसका घर ध्वस्त करा दिया गया था तथा पुलिस ने जांच के बाद 2007 में ही अंतिम रिपोर्ट दायर कर दी थी जो संबंधित अदालत के समक्ष लंबित है। अफसर खान की 2017 में मृत्यु हो गई और उसके बेटे जुल्फिकार खान ने पुलिस द्वारा दाखिल अंतिम रिपोर्ट के खिलाफ विरोध याचिका दायर की जिस पर रामपुर के विशेष न्यायाधीश (सांसद/विधायक) ने 21 जनवरी 2025 को इस मामले की आगे और जांच करने का आदेश पारित किया था।

18 साल बाद दाखिल की गई यह विरोध याचिका

आजम खान के वकील ने दलील दी कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की वजह से ही क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने के 18 साल बाद यह विरोध याचिका दाखिल की गई। इस मामले में 10 जुलाई, 2007 को प्राथमिकी दर्ज की गई और पुलिस ने जांच के बाद सात दिसंबर 2007 को याचिकाकर्ता के पक्ष में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की। उन्होंने कहा कि अंतिम रिपोर्ट के आधार पर शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किए गए और इसके बाद यह मामला लंबित रहा और अंतिम रिपोर्ट पर कोई आदेश पारित नहीं किया गया।

उनके मुताबिक, शिकायतकर्ता अफसर खान का 18 अक्टूबर 2017 को निधन हो गया जिसकी सूचना अदालत को 16 जनवरी 2023 को दी गई और आपत्ति दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर दिया गया।

अगली सुनवाई की तिथि पांच मई 2025 तय की गई

आजम खान के वकील ने बताया कि अफसर खान के पुत्र जुल्फिकार खान ने सात दिसंबर 2024 को विरोध याचिका दायर की जिस पर जुल्फिकार खान का पक्ष सुनने के बाद मामले में आगे और जांच करने का आदेश 21 जनवरी 2025 को पारित किया गया।

राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का समय देते हुए अदालत ने बुधवार को पारित अपने आदेश में अगली सुनवाई की तिथि पांच मई 2025 तय की और आदेश दिया कि तब तक याचिकाकर्ता को उक्त मामले में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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