प्रयागराज

आईफोन, इंटरनेट कॉल, कोस्ट पिस्टल और रेकी...उमेश पाल हत्याकांड में पुलिस का बड़ा खुलासा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 22, 2023, 07:24 PM IST

प्रयागराज पुलिस ने मंगलवार को उमेश पाल हत्याकांड से जुड़े पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया था। इनसे पूछताछ के बाद पता चला है कि हत्याकांड से पहले उमेश की हर मूवमेंट असद तक पहुंचाई जा रही थी।

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उमेश पाल हत्याकांड में पुलिस ने किए बड़े खुलासे

Photo : PTI

Umesh Pal Murder Case: उमेश पाल हत्याकांड में पुलिस ने कई बड़े खुलासे किए हैं। पुलिस के मुताबिक, हत्याकांड में कोस्ट पिस्टल का इस्तेमाल किया गया था। इतना ही नहीं हत्या से पहले उमेश पाल की हर मूवमेंट और लोकेशन पर आरोपियों की नजर थी। पुलिस ने बताया है कि उमेश पाल की रेकी की जिम्मेदारी असद ने उसके ही पड़ोसी को दी थी।

हत्या की साजिश से पहले माफिया अतीक अहमद के बेटे असद ने शूटरों के साथ बैठकें की थीं। उसने अपने गुर्गों को आईफोन भी दिए थे। यह जानकारी प्रयागराज पुलिस ने पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ के बाद दी है। पुलिस ने बताया, आईफोन पर इंटरनेट कॉल के जरिए ही असद तक हत्याकांड से पहले की पूरी जानकारी पहुंच रही थी।

मंगलवार को हुई थी गिरफ्तारी

बता दें, प्रयागराज पुलिस ने धूमनगंज के जयरामपुर से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें नियाज अहमद, मोहम्मद सजर, कैश अहमद, राकेश कुमार ओर अरशद कटरा शामिल हैं। पुलिस ने बताया, अभियुक्त नियाज अहमद को असद ने उमेश पाल की रेकी करने का काम सौंपा था। वह उमेश पाल की कचहरी से लेकर घर तक आने-जाने की हर सूचना असद तक पहुंचा रहा था। इसके अलावा उमेश पाल के घर के पास रहने वाले मोहम्मद सजर को उमेश की गाड़ी की लोकेशन बताने का जिम्मा सौंपा गया था। इसके अलावा अरशद कटरा भी हत्या की प्लानिंग में शामिल था।

अतीक के दफ्तर से मिले 74 लाख रुपये

पुलिस की गिरफ्त में आए दो अभियुक्तों कैश अहमद ओर राकेश कुमार की निशानदेही पर पुलिस ने अतीक अहमद के चकिया स्थित दफ्तर पर छापा मारा। यहां से पुलिस ने 72 लाख रुपये से ज्यादा की रकम बरामद किए हैं। इसके अलावा 11 असलहे भी बरामद किए गए हैं। इसमें कोस्ट पिस्टल भी शामिल है। पुलिस का कहना है कि सभी अभियुक्तों से अभी पूछताछ चल रही है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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